छत्तीसगढ़ में UCC की दिशा में बड़ा कदम, सेवानिवृत्त SC न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित
सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया आदेश, विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे विषयों पर देगी सिफारिशें, जनता व विशेषज्ञों से भी मांगे जाएंगे सुझाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए इसके अध्ययन एवं प्रारूप तैयार करने के लिए समिति का गठन किया है। इसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समिति के गठन की जानकारी साझा की है।
समिति का गठन
जारी आदेश के अनुसार, समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। समिति के अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा ज्योति रानी सिंह शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति देसाई इससे पहले उत्तराखंड और गुजरात में यूसीसी का प्रारूप तैयार करने वाली समिति का भी नेतृत्व कर चुकी हैं।
समिति के प्रमुख कार्य
समिति के प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
– छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के संबंध में वर्तमान विधिक स्थिति का अध्ययन करना।
– विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण एवं संबंधित विषयों पर समान नागरिक संहिता के लिए सुझाव देना।
– नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना।
– अन्य राज्यों में लागू या प्रचलित समान नागरिक संहिता संबंधी व्यवस्थाओं का अध्ययन करना।
– समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार कर राज्य शासन को प्रस्तुत करना।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि वर्तमान में राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण जैसे मामले अलग-अलग धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों द्वारा शासित होते हैं, जिससे कानूनी प्रक्रिया जटिल हो जाती है। यूसीसी का उद्देश्य कानूनों को सरल बनाकर धार्मिक और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है। यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप है, जो राज्य को सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देता है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दल कांग्रेस ने इस कदम को जनजातीय अधिकारों के लिए खतरा बताते हुए आलोचना की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह निर्णय आदिवासियों के हितों के खिलाफ है, क्योंकि उन्हें संविधान की पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) अधिनियम जैसे प्रावधानों के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने आशंका जताई कि यूसीसी लागू होने पर ये संरक्षण प्रभावित हो सकते हैं।
आगे की प्रक्रिया
समिति द्वारा तैयार की जाने वाली रिपोर्ट और अनुशंसाओं के आधार पर राज्य सरकार आगे की कार्रवाई करेगी। समिति नागरिकों, संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगेगी और एक ड्राफ्ट तैयार करेगी, जिसे विधानसभा में पेश किए जाने से पहले मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
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