राम मंदिर ट्रस्ट ने PMO को भी नहीं दिया चढ़ावे का हिसाब, एसआईटी जांच का हवाला देकर टाला जवाब, 60 किलो चांदी गायब होने की भी चर्चा

Ram Mandir donation controversy

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट ने पीएमओ के पत्र पर जिला प्रशासन को बताया- एसआईटी जांच के चलते वित्तीय जानकारी साझा नहीं कर सकते

 

 

अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में हैरान करने वाली खबर सामने आई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के पत्र पर राम मंदिर ट्रस्ट ने वित्तीय ब्योरा देने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने इसके लिए एसआईटी जांच का हवाला दिया है और पीएमओ तक से जानकारी साझा करना उचित नहीं समझा।

 

PMO के पत्र पर ट्रस्ट ने क्यों किया इनकार?

दरअसल, स्थानीय भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने PMO को पत्र लिखकर ट्रस्ट की शुरुआत से अब तक के आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्ति का पूरा ब्योरा सार्वजनिक कराने की मांग की थी। PMO ने यह पत्र जिला प्रशासन को संदर्भित किया, जिसके बाद प्रशासन ने ट्रस्ट से वित्तीय जानकारी मांगी।

 

23 जून को अयोध्या के एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को लिखे पत्र में एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने चंपत राय से संपर्क किया था। चंपत राय ने साफ कहा कि एसआईटी जांच चल रही है और जांच पैनल सभी जरूरी रिकॉर्ड इकट्ठा कर रहा है, इसलिए अभी मांगी गई जानकारी नहीं दी जा सकती।

 

एसआईटी जांच की नई परतें

बता दें कि 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट की मांग पर चढ़ावे में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच 150 पेज की रिपोर्ट के रूप में सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट में चढ़ावे के दस्तावेजीकरण और लेखांकन में विसंगतियां पाई गई हैं। खासकर 2025 के महाकुंभ के दौरान मंदिर में भारी भीड़ के समय दान के लेखे-जोखे को लेकर सवाल उठे हैं।

 

गायब चांदी की बढ़ती चर्चा

मामले में एक और नया मोड़ 60 किलो चांदी गायब होने की चर्चा है। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने बताया कि देशभर के सराफा व्यापारियों ने 10-10 और 20-20 ग्राम चांदी भेजकर करीब 60 किलो चांदी इकट्ठा की थी। इस चांदी को गलाकर ईंटें बनाई गईं, जिन पर दानदाताओं के नाम और गोत्र लिखे गए थे। 20 जुलाई 2020 को चंपत राय की सहमति के बाद ये चांदी की ईंटें अयोध्या स्थित रामकचहरी में सौंपी गई थीं।

 

रस्तोगी का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि इस चांदी का क्या हुआ। वहीं, विश्व सिंधी सेवा संगम के अध्यक्ष राजू मनवानी ने दावा किया है कि सिंधी समुदाय ने 200 किलो चांदी मंदिर को दान में दी थी, जिसका आज तक कोई ब्योरा नहीं दिया गया।

 

विपक्ष का हमला और कोर्ट में पीआईएल

विपक्षी नेताओं ने इस मामले को लेकर सरकार पर हमला बोला है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे ‘महापाप’ करार देते हुए कहा कि देश-विदेश से आए दान और चढ़ावे के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने एसआईटी की जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।

 

इसके अलावा, अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर मामले में उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की है। याचिका में राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक, अयोध्या के डीएम, एसएसपी और ट्रस्ट सचिव को पक्षकार बनाया गया है।

 

फिलहाल, एसआईटी की जांच जारी है और उम्मीद है कि अगले 10-15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपी जाएगी। तब तक, राम मंदिर चढ़ावा मामला सियासी और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना रहेगा।

 

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