OBC सर्वे में बड़ा खेल! पढ़े-लिखे लोगों को बताया अशिक्षित, कामकाज करने वालों को बना दिया बेरोजगार

OBC सर्वे विवाद

छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करने के लिए चलाए जा रहे सर्वेक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सर्वे डेटा की ऑनलाइन एंट्री के दौरान कई जगहों पर ऐसी गलतियां मिली हैं, जिनसे पूरे सर्वे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित निकायों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।

शिक्षित लोगों को बताया अशिक्षित

आयोग की जांच में पाया गया कि कई परिवारों के सदस्यों को शिक्षित होने के बावजूद अशिक्षित दर्ज कर दिया गया है। वहीं नौकरी, व्यवसाय या अन्य कार्यों में लगे लोगों को भी बेरोजगार या गैर-कार्यरत बताया गया है। इससे सर्वे में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की जानकारी अधूरी

सर्वे में यह भी पाया गया कि कई परिवार विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर केवल राशन कार्ड का लाभ दर्ज किया गया है। आवास योजना, पेंशन, ऋण अनुदान और अन्य योजनाओं से जुड़ी जानकारी कई मामलों में या तो गायब है या गलत दर्ज की गई है।

आय और संपत्ति से जुड़ी जानकारी में भी त्रुटियां

आयोग ने पाया कि कई परिवारों की वार्षिक आय या तो शून्य दिखाई गई है या एक ही क्षेत्र के सभी परिवारों की आय समान दर्ज कर दी गई है। कई मामलों में स्वयं का मकान होने की जानकारी दर्ज है, लेकिन चल-अचल संपत्ति और भूमि स्वामित्व संबंधी कॉलम खाली छोड़ दिए गए हैं। इससे आंकड़ों की सटीकता पर सवाल उठ रहे हैं।

आयोग ने निकायों को दिए सख्त निर्देश

मामले को गंभीर मानते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे क्षेत्र में जाकर परिवारों से दोबारा संपर्क करें, अधूरी जानकारियों को अपडेट करें और पोर्टल पर केवल सत्यापित जानकारी ही दर्ज करें।

कोरबा के एक परिवार की एंट्री बनी उदाहरण

सर्वे में कोरबा के एक परिवार का मामला भी सामने आया, जहां पांच सदस्यों वाले परिवार को पूरी तरह अशिक्षित बताया गया। सभी को गैर-कार्यरत दर्शाया गया और वार्षिक आय शून्य दर्ज कर दी गई। इतना ही नहीं, परिवार के पास स्वयं का मकान होने के बावजूद संपत्ति संबंधी अन्य कॉलम खाली या शून्य भरे गए थे।

भविष्य की नीतियों पर पड़ सकता है असर

आयोग का कहना है कि यह सर्वे भविष्य में OBC वर्ग से जुड़ी योजनाओं और नीतियों का आधार बनेगा। ऐसे में यदि आंकड़े गलत दर्ज किए गए तो इससे सरकारी योजनाओं के निर्माण और लाभ वितरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आयोग ने चेतावनी दी है कि सर्वेक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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