मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध: खेल मैदानों के संरक्षण की मांग को लेकर खिलाड़ियों का प्रदर्शन
राजनांदगांव में खेल मैदानों में लगातार शासकीय और अर्धशासकीय कार्यक्रम आयोजित किए जाने को लेकर खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों का विरोध बढ़ता जा रहा है। सोमवार को एक बार फिर स्टेट हाई स्कूल मैदान में प्रस्तावित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यक्रम के विरोध में खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि खेल मैदानों का उपयोग केवल खेल गतिविधियों और खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए होना चाहिए, लेकिन लगातार आयोजनों से मैदानों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की तैयारियों के बीच पहुंचा विरोध प्रदर्शन
स्टेट हाई स्कूल मैदान में मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान शहर के खिलाड़ी और खेल प्रेमी बैनर-पोस्टर लेकर कार्यक्रम स्थल के बाहर पहुंचे और मैदानों के संरक्षण की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शहर के प्रमुख खेल मैदानों में बार-बार सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जाने से खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया
विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को कार्यक्रम स्थल से हटाया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस वाहनों के जरिए वहां से अन्य स्थानों पर ले जाया गया। हालांकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने की बात कहते रहे।
मैदानों की गुणवत्ता खराब होने का आरोप
खिलाड़ियों का कहना है कि बड़े आयोजनों के कारण मैदानों की सतह और संरचना को नुकसान पहुंचता है। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मैदानों को फिर से खेल योग्य बनाने में लंबा समय लग जाता है, जिससे खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की तैयारी प्रभावित होती है। उनका कहना है कि खेल सुविधाओं के संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
वैकल्पिक स्थानों पर कार्यक्रम कराने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय और अर्धशासकीय कार्यक्रमों के लिए अलग स्थायी स्थान तय किए जाएं। उनका कहना है कि खेल मैदानों को केवल खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उल्लेखनीय है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।
