Chhattisgarh Politics: रिसाली नगर निगम में कांग्रेस को बड़ा झटका, MIC सदस्य सीमा साहू ने थामा BJP का दामन
Chhattisgarh Politics: रिसाली नगर निगम में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। वार्ड क्रमांक 28 वीआईपी नगर की पार्षद और एमआईसी सदस्य डॉ. सीमा साहू ने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। उन्होंने दुर्ग सांसद विजय बघेल के निवास पर भाजपा में शामिल होकर पार्टी की सदस्यता ली। इस मौके पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर और जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक भी मौजूद रहे।
डॉ. सीमा साहू महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रभारी भी थीं और निगम की प्रभावशाली एमआईसी सदस्य मानी जाती थीं। इससे पहले भी कांग्रेस के चार पार्षदों ने महापौर शशि सिन्हा से नाराज होकर भाजपा का रुख किया था। अब सीमा साहू के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस की स्थिति और भी कमजोर होती दिखाई दे रही है।
महापौर की कार्यशैली से थीं नाराज़
डॉ. साहू ने भाजपा में शामिल होने के बाद अपने फैसले की वजह महापौर की कार्यशैली को बताया। उनका कहना है कि, “महापौर को जिस तरह से एमआईसी सदस्यों और पार्षदों को साथ लेकर चलना चाहिए, उस भावना की कमी साफ दिखाई दी। इसी कारण पहले भी कई पार्षदों ने असंतोष जताते हुए भाजपा का दामन थामा था।”
कांग्रेस से महापौर बनने की उम्मीद थी
वर्ष 2019 के चुनाव में डॉ. सीमा साहू कांग्रेस के टिकट पर वार्ड क्रमांक 28 से पार्षद चुनी गई थीं। महापौर पद अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित होने के कारण उनका नाम इस पद के लिए प्रबल दावेदारों में शामिल था। इतना ही नहीं, उनका पारिवारिक संबंध तत्कालीन गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू से भी था, जिससे उन्हें पार्टी से महापौर का टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी। लेकिन कांग्रेस ने अंतिम समय में शशि सिन्हा को उम्मीदवार घोषित कर दिया, जो अंततः महापौर चुनी गईं।
BJP ने बताया कांग्रेस में असंतोष का परिणाम
सीमा साहू के भाजपा में शामिल होने पर पार्टी नेताओं ने कहा कि यह कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और महापौर की कार्यशैली के खिलाफ पार्षदों के गुस्से का परिणाम है। सांसद विजय बघेल ने स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा में सभी को सम्मान और कार्य करने की स्वतंत्रता मिलती है। आने वाले दिनों में और भी नेता व पार्षद भाजपा का साथ पकड़ेंगे।
रिसाली निगम में लगातार कांग्रेस पार्षदों के पार्टी छोड़ने से जहां भाजपा का मनोबल बढ़ रहा है, वहीं कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक संकट बनता जा रहा है। सीमा साहू जैसी सक्रिय और अनुभवी पार्षद का पार्टी छोड़ना निगम के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
