नक्सलियों की कमर तोड़ने वाले IPS सुंदरराज पी को मिली नई जिम्मेदारी, अब NIA में आतंकियों के खिलाफ संभालेंगे मोर्चा
छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुंदरराज पी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में महानिरीक्षक (IG) के पद पर नियुक्त किया गया है। बस्तर में लंबे समय तक नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने वाले सुंदरराज अब राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगे। उनकी नियुक्ति को सुरक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।
बस्तर में बिताया करियर का बड़ा हिस्सा
अपने पुलिस करियर के दौरान सुंदरराज पी ने बस्तर क्षेत्र में लंबा समय बिताया। एएसपी से लेकर एसपी, डीआईजी और आईजी तक उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों, जनजीवन और नक्सली गतिविधियों की गहरी समझ के कारण वे राज्य के सबसे अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं।
नक्सल विरोधी अभियानों में निभाई अहम भूमिका
बस्तर में तैनाती के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों और खुफिया तंत्र के समन्वय से कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में सुरक्षा बलों ने कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं और नक्सली नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में उल्लेखनीय काम हुआ। रणनीतिक योजना और फील्ड ऑपरेशन में उनकी सक्रिय भूमिका की अक्सर चर्चा होती रही है।
तमिलनाडु से बस्तर तक का सफर
तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी सुंदरराज पी ने कम उम्र में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। छत्तीसगढ़ कैडर मिलने के बाद उनकी शुरुआती नियुक्ति बस्तर क्षेत्र में हुई। इसके बाद उन्होंने राज्य के कई संवेदनशील जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं और प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया।
कई जिलों में रहे पुलिस अधीक्षक
सुंदरराज पी ने नारायणपुर, बस्तर, कोरबा, सरगुजा, राजनांदगांव और कबीरधाम जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। लगभग एक दशक तक विभिन्न जिलों में एसपी रहते हुए उन्होंने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
अब राष्ट्रीय स्तर पर संभालेंगे जिम्मेदारी
NIA में नई नियुक्ति के बाद सुंदरराज पी की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। माना जा रहा है कि नक्सलवाद और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ उनके अनुभव का लाभ अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी को मिलेगा। सुरक्षा मामलों में उनकी विशेषज्ञता और फील्ड अनुभव नई जिम्मेदारी में अहम साबित हो सकते हैं।
