सूर्य पर हुआ खतरनाक विस्फोट… NASA ने जारी किया हाई अलर्ट! क्या पृथ्वी पर आने वाला है सौर संकट?

Solar storm June 2026

NASA और NOAA के मुताबिक एक्टिव रीजन 4461 में M1.8 श्रेणी का सोलर फ्लेयर हुआ, G3 कैटेगरी का जियोमैग्नेटिक तूफान धरती से टकराएगा, लद्दाख और हिमालयी इलाकों में हरी-लाल बत्तियां देखने का मौका

 

जो सूर्य हमें रोशनी और जीवन देता है, वही इस समय अपना खतरनाक रूप दिखा रहा है। शांत दिखने वाला सूरज पिछले एक हफ्ते से लगातार आग उगल रहा है। सूर्य की सतह पर 6 जून की सुबह भयंकर विस्फोट हुआ है। यह विस्फोट इतना शक्तिशाली है कि इससे निकला चुंबकीय प्लाज्मा 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की अविश्वसनीय रफ्तार से सीधे पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) और स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (NOAA) ने इसको लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है और G3 कैटेगरी के भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) की घोषणा की है।

 

विस्फोट के केंद्र से एक बेहद घना, भारी और अत्यधिक चुंबकीय फिलामेंट बाहर निकला है, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘टेक्स्टबुक कोर फिलामेंट इरप्शन’ (एक आदर्श केंद्रीय विस्फोट) करार दिया है। यह तूफान सोमवार-मंगलवार की रात धरती से टकराएगा, जिससे उत्तरी भारत के ऊंचाई वाले इलाकों में ऑरोरा यानी उत्तरी रोशनी देखने को मिल सकती है।

 

एस शेप वाली चुंबकीय लकीर जिसने बढ़ाई नासा की चिंता

वैज्ञानिकों के अनुसार, सूर्य के जिस सक्रिय हिस्से (एक्टिव रीजन 4461) से यह विस्फोट हुआ, वहां की चुंबकीय रेखाएं अंग्रेजी के ‘S’ अक्षर के आकार में एक स्प्रिंग की तरह बुरी तरह आपस में उलझी और मरोड़ी हुई थीं। जब कोई चुंबकीय क्षेत्र इस तरह मुड़ जाता है, तो वह अपने अंदर अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा जमा कर लेता है।

 

जैसे ही यह चुंबकीय तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंचा, ये रेखाएं अचानक टूट गईं और आपस में दोबारा जुड़ गईं। इस झटके से एक तरफ भयानक एक्स-रे (X-ray) विकिरण निकला, जिसने पृथ्वी पर रेडियो संचार व्यवस्था को प्रभावित किया। इस धमाके को वैज्ञानिकों ने M1.8 श्रेणी का सोलर फ्लेयर नाम दिया है।

 

 

Solar storm June 2026

क्या होता है फिलामेंट और कितना खतरनाक?

सूर्य के बाहरी वायुमंडल (कोरोना) का तापमान लगभग 10 से 20 लाख डिग्री सेल्सियस होता है। वहीं, फिलामेंट के अंदर फंसी हुई प्लाज्मा का तापमान केवल 5,000 से 10,000 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है। सूर्य के पैमाने पर यह बेहद ठंडा और बहुत भारी माना जाता है।

 

जब इस भारी गैस को थामे रखने वाला चुंबकीय पिंजरा कमजोर हो जाता है, तो यह फिलामेंट अचानक टूट जाता है और रबर बैंड की तरह झटके से अंतरिक्ष में फैल जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलामेंट विस्फोट अक्सर सामान्य सौर विस्फोटों की तुलना में अधिक मजबूत जियोमैग्नेटिक प्रभाव पैदा करते हैं क्योंकि ये अधिक घने और अधिक चुंबकीय होते हैं।

 

भारत के आसमान में भी दिखेगी हरी-लाल रोशनी

चार्ज्ड सौर कण जब पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में मौजूद गैसों (जैसे ऑक्सीजन और नाइट्रोजन) से टकराते हैं, तो आसमान में हरे, बैंगनी और लाल रंग के चमकदार पर्दे जैसे नजारे बनते हैं। आमतौर पर यह नजारा केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में ही दिखाई देता है, लेकिन जब सौर तूफान G3 (Strong) या उससे ऊपर का होता है, तो ऑरोरा का यह घेरा खिसककर नीचे आ जाता है।

 

NOAA के अनुसार, यह तूफान 8 जून (सोमवार) की रात से 9 जून (मंगलवार) तक सक्रिय रहेगा। इसकी अधिकतम तीव्रता रात 11:30 बजे से लेकर सुबह 2:30 बजे के बीच रहने की उम्मीद है। अगर आसमान साफ रहा तो लद्दाख के हनले, पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी, कश्मीर के गुलमर्ग, हिमाचल के स्पीति घाटी और उत्तराखंड के मुनस्यारी में उत्तरी रोशनी देखने को मिल सकती है।

 

Solar storm June 2026

तूफान का रेडियो और सैटेलाइट पर भी असर

इस तूफान का सबसे बड़ा असर पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में देखने को मिलेगा। अत्यधिक ऊर्जा के कारण ऊपरी वायुमंडल गर्म होकर फैल जाएगा, जिससे निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में मौजूद सैटेलाइट्स पर ड्रैग (खिंचाव) बढ़ जाएगा। इससे सैटेलाइट्स की कक्षा प्रभावित हो सकती है। वहीं, हाई-फ्रीक्वेंसी (HF) रेडियो बैंड में भी सिग्नल फीके पड़ सकते हैं या अस्थायी रूप से ब्लैकआउट हो सकते हैं।

 

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