मणिपुर में बवाल! आखिर क्यों सेना के खिलाफ सड़क पर उतरीं तंगखुल महिलाएं?
उखरुल के शोक्वाओ और न्यू हेवन में सैकड़ों महिलाओं ने किया असम राइफल्स का विरोध, ग्राम प्रशासन की सहमति के बिना बनाया गया बंकर बना विवाद का कारण
उखरुल, मणिपुर। मणिपुर के उखरुल जिले के शोक्वाओ और न्यू हेवन इलाके में रविवार सुबह सैकड़ों महिलाओं ने असम राइफल्स के जवानों और उनके वाहनों का भारी विरोध किया। महिलाओं के हाथों में मशालें और लाठियां थीं। तंगखुल नगा समुदाय की ये महिलाएं ‘हमारी जमीन, हमारा अधिकार’ का नारा लगाते हुए जवानों को आगे नहीं बढ़ने दे रही थीं। इस दौरान हुई झड़प में 22 महिलाएं घायल हो गईं ।
क्यों भड़की महिलाएं? विवाद का मूल कारण
विवाद की जड़ न्यू हेवन क्षेत्र में असम राइफल्स द्वारा एक अस्थायी बंकर (आउटपोस्ट) बनाए जाने को लेकर है। प्रदर्शनकारी महिलाओं और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि यह बंकर शोक्वाओ गांव की विलेज अथॉरिटी (ग्राम प्रशासन) की सहमति के बिना बनाया गया ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मणिपुर (हिल एरियाज विलेज अथॉरिटीज) एक्ट, 1956 और संविधान के अनुच्छेद 371C का सीधा उल्लंघन है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में ग्राम प्रशासन के अधिकारों और पारंपरिक स्वशासन को संरक्षित करते हैं ।
स्थिति कैसे बिगड़ी? मशालों से लेकर पेट्रोल तक
सूत्रों के मुताबिक, शोक्वाओ गांव की महिलाओं ने न्यू हेवन की ओर बढ़ रहे काफिले को शनिवार देर रात ही रोक लिया था, जिससे रातभर तनाव बना रहा। सुबह होते ही एक तरफ महिलाओं ने शोक्वाओ में ब्लॉकेड बनाया, तो दूसरी तरफ कुछ लोगों ने न्यू हेवन में सुरक्षा बल के बंकर को ध्वस्त कर दिया ।
जब महिलाएं जवानों को रोकने के लिए आगे बढ़ीं, तो स्थिति और बिगड़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जवानों ने बिना मजिस्ट्रेट या पुलिस की मौजूदगी के हवाई फायरिंग और लाठीचार्ज किया । वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जवानों का दावा है कि प्रदर्शनकारी महिलाओं ने उन पर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की । इस झड़प में 22 महिलाएं घायल हुईं, जिन्हें उखरुल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है ।
असम राइफल्स पर गंभीर आरोप
तंगखुल नागा लांग (TNL), तंगखुल समुदाय के शीर्ष संगठन ने, असम राइफल्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। TNL का आरोप है कि 40वीं बटालियन के जवानों ने महिलाओं पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे और यहां तक कि स्वचालित राइफलों से फायरिंग भी की । TNL के अनुसार, फिंच कॉर्नर में तो इस बटालियन के कमांडर कर्नल सुनील सिंह लुंथी ने खुद महिलाओं पर लाठीचार्ज का नेतृत्व किया । TNL ने इस घटना को एक पेशेवर अर्धसैनिक बल के लिए ‘अनुचित और शर्मनाक’ बताया है ।
संगठनों ने सवाल उठाया है कि जब ‘पहाड़ी लोगों के मित्र’ का नारा देने वाली असम राइफल्स ही इस तरह का व्यवहार कर रही है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी । स्थानीय छात्र संगठन काठो कतमनाओ लांग (KKL) ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और आरोप लगाया है कि असम राइफल्स ने निहत्थे महिलाओं को डराने के लिए जिंदा गोलियों का इस्तेमाल किया ।
तनाव जारी, एनएच-202 हुआ बंद
घटना के बाद से शोक्वाओ-न्यू हेवन क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। काठो कतमनाओ लांग (KKL) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-202 (NH-202) पर अनिश्चितकालीन यातायात बंदी का आह्वान किया है, जिससे इलाके में वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है । महिलाओं ने चेतावनी दी है कि असम राइफल्स को तुरंत वापस बुलाया जाए, अन्यथा कोई भी अप्रिय घटना होने पर उसकी जिम्मेदारी असम राइफल्स की होगी ।
कौन हैं तंगखुल महिलाएं?
तंगखुल उत्तर-पूर्व भारत के प्रमुख नगा समुदायों में से एक हैं। वे मुख्य रूप से मणिपुर के उखरुल और कामजोंग जिलों में रहते हैं। उनकी आबादी का एक हिस्सा म्यांमार के सोमरा क्षेत्र में भी बसता है। यह समुदाय अपनी विशिष्ट भाषा, बुनाई, कृषि परंपराओं और सामुदायिक जीवन के लिए जाना जाता है । प्रदर्शन में शामिल अधिकांश महिलाएं थीं, जो न्यू हेवन क्षेत्र में असम राइफल्स की एक चौकी/आउटपोस्ट बनाए जाने का विरोध कर रही थीं ।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जबकि घायल महिलाओं का इलाज जारी है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर स्थानीय संगठनों का दबाव बढ़ता जा रहा है ।
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