“कालापानी हमारा है…” नेपाल ने फिर ठोका दावा, जानिए क्या है पूरा विवाद?

Nepal India border dispute

विदेश मंत्री शिशिर खनाल बोले- कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा पर हमारा दावा बरकरार, लेकिन रिश्ते आगे बढ़ाएंगे

 

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की तीन दिन की यात्रा खत्म होने पर सीमा विवाद को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे मुद्दों का हल केवल भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय बातचीत से ही होगा। नेपाल किसी तीसरे देश या अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ की मदद नहीं चाहता।

खनाल ने कहा कि प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह की नई सरकार पुराने विवादों को भारत-नेपाल दोस्ती का बोझ नहीं बनने देगी। हम भविष्य की ओर देखना चाहते हैं। दोनों देश साझा विकास, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर साथ काम करें।

 

नेपाल का दावा

नेपाल का कहना है कि ये तीनों इलाके ऐतिहासिक रूप से उसके हैं और इसके लिए पुराने दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संसद में भी यही बात कही थी। विदेश मंत्री खनाल ने बताया कि अगर ये क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं, तो वहां होने वाली किसी भी गतिविधि या समझौते में नेपाल की सहमति जरूरी है। उन्होंने भारत-चीन के बीच लिपुलेख इलाके से जुड़े समझौतों का जिक्र करते हुए यह बात कही।

जब प्रधानमंत्री शाह ने चीन और ब्रिटेन का नाम लिया था तो भारत ने आपत्ति जताई थी। खनाल ने इसका जवाब देते हुए कहा कि ब्रिटेन का जिक्र सिर्फ पुराने दस्तावेजों की जानकारी के लिए था, किसी मध्यस्थता की मांग नहीं थी।

 

 क्या है विवाद 

यह विवाद पुराना है। 1816 की सुगौली संधि में काली नदी को नेपाल की पश्चिमी सीमा माना गया था। लेकिन नदी कहां से शुरू होती है, इस पर दोनों देशों में मतभेद है। नेपाल लिम्पियाधुरा को उद्गम स्थल मानता है, जबकि भारत कालापानी क्षेत्र को अपना बताता है। 2020 में नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी करके इन इलाकों को शामिल किया था। यह क्षेत्र भारत-चीन सीमा के पास है और कैलाश-मानसरोवर यात्रा का रास्ता भी यहीं से जाता है।

 

भविष्य पर जोर

खनाल ने कहा कि सीमाएं रिश्तों को तोड़ने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली होनी चाहिए। उन्होंने भारत को तेजी से बढ़ती हुई बड़ी ताकत बताया और कहा कि नेपाल अपनी तरक्की को भारत की प्रगति के साथ जोड़ना चाहता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई बातचीत में व्यापार, बिजली, सड़क, इंटरनेट और नई तकनीक जैसे मुद्दों पर अच्छी चर्चा हुई।

 

शिशिर खनाल की यह यात्रा नेपाल की नई सरकार की परिपक्व सोच दिखाती है। पहले राष्ट्रवाद की ज्यादा बात होती थी, लेकिन अब सरकार रिश्तों को आगे बढ़ाने और आर्थिक सहयोग पर फोकस कर रही है। दोनों देशों के बीच खुलेपन, सांस्कृतिक रिश्ते और आर्थिक जुड़ाव बहुत मजबूत है। 

 

सीमा विवाद अभी भी है, लेकिन इसे द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने का फैसला सही दिशा है। अगर दोनों पड़ोसी पुरानी बातों को छोड़कर भविष्य पर ध्यान दें तो दोनों देशों का फायदा होगा। 

 

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