पूर्व महापौर राजेश पांडेय और बेटे पर FIR, CCTV वीडियो वायरल होने के बाद मचा बवाल
सोसायटी बैठक के बाद विवाद बढ़ा, रास्ता रोककर मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप, CCTV फुटेज वायरल
बिलासपुर की शिवम एन्क्लेव में हुई घटना कोई साधारण झगड़ा नहीं है। यह छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन की सड़ांध की तस्वीर है। पूर्व महापौर और कांग्रेस नेता राजेश पांडेय तथा उनके बेटे राहुल पांडेय पर एक आम नागरिक अमित शर्मा का रास्ता रोककर गाली-गलौज, पत्थर से हमला, मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप लगा है। सोसायटी की बैठक के बाद हुई इस घटना का CCTV फुटेज वायरल हो चुका है। पुलिस ने BNS की धाराओं 296, 115(2), 351(3), 126(2) और 3(5) के तहत FIR दर्ज कर ली है।
राजेश पांडेय पूर्व महापौर रह चुके हैं। उनके रिकॉर्ड में विवाद ही विवाद नजर आते हैं। अब उनके बेटे राहुल के साथ मिलकर एक सोसायटी की बैठक के बाद एक व्यक्ति को इस कदर पीटना और धमकाना यह दर्शाता है कि इनके लिए आम आदमी कुछ नहीं, सिर्फ वोट बैंक या निजी दुश्मन है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि एक पूर्व महापौर, जो कभी पद की शपथ ले चुका है, सोसायटी की बैठक जैसे छोटे-मोटे मुद्दे पर इस कदर भड़क जाता है। क्या इतनी जल्दी सत्ता का नशा उतर नहीं पाता? क्या पद छोड़ने के बाद भी ये लोग खुद को राजा समझते रहते हैं?
कांग्रेस पार्टी को इस पर चुप्पी साध लेनी चाहिए या बचाव करना चाहिए? यही पार्टी कानून-व्यवस्था की बात करती है, आम आदमी की रक्षा की डींगें मारती है। लेकिन जब उसके अपने नेता इस कदर गुंडागर्दी करते हैं तो चुप्पी क्यों?
यह घटना युवा पीढ़ी के लिए भी खतरनाक संदेश देती है। राहुल पांडेय, जो पिता की छत्रछाया में बड़े हुए, अगर इस उम्र में ही पत्थर मारने और जान से मारने की धमकी देने लगे तो भविष्य में क्या उम्मीद की जा सकती है? यह परिवारवाद का सबसे घटिया रूप है जहां पिता का पद और प्रभाव बेटे को गुंडे बनने का लाइसेंस दे देता है। समाज में ऐसे लोग नेतृत्व कैसे करेंगे जब वे खुद बुनियादी नागरिक शिष्टाचार का पालन नहीं कर पाते?
CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लोग पूछ रहे हैं अगर आम आदमी ऐसा करता तो क्या होता? जेल हो जाती, लेकिन नेता होने के नाते क्या ये लोग बच निकलेंगे? पुलिस जांच चल रही है, लेकिन इतिहास गवाह है कि ऐसे मामलों में प्रभावशाली लोग अक्सर सबूत गायब करवाते हैं या केस को लंबा खींचते हैं।
यह घटना बिलासपुर जैसे शहर के लिए शर्म की बात है। न्यायधानी कहलाने वाला शहर जहां पूर्व महापौर खुद कानून तोड़ने का आरोप झेल रहा है।
लोकतंत्र में नेता जनता का सेवक होता है, राजा नहीं। लेकिन राजेश पांडेय और राहुल जैसे लोग इस सिद्धांत को ताक पर रख देते हैं। वे सोचते हैं कि पद और पार्टी का झंडा उन्हें हर गलती का अधिकार दे देता है।
नोट: वायरल वीडियो की सत्यता और पूरी घटना का संदर्भ पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। दोनों पक्षों की बात सुनी जाएगी।
