सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य, समयसीमा बढ़ाकर 2028 तक की
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी और सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अब अनिवार्य शर्त होगी। हालांकि अदालत ने शिक्षकों को राहत देते हुए यह समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है, ताकि वे निर्धारित अवधि में परीक्षा पास कर अपनी नौकरी जारी रख सकें।
65 से ज्यादा याचिकाएं खारिज, पुराने फैसले पर दोबारा मुहर
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इस मामले से जुड़ी 65 से अधिक पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये याचिकाएं राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों और व्यक्तिगत शिक्षकों की ओर से दायर की गई थीं, जिनमें 2025 के ‘अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट’ मामले के फैसले को चुनौती दी गई थी।
समयसीमा में आंशिक राहत, अब 3 साल में TET अनिवार्य
पहले दिए गए फैसले में शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करने का निर्देश था, जिसे अब अदालत ने संशोधित कर तीन साल कर दिया है। इसके तहत अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक यह योग्यता हासिल करनी होगी। अदालत ने कहा कि परीक्षा आयोजित करने में व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए समय में आंशिक छूट दी जा रही है।
“अब और समय नहीं मिलेगा” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब इस मामले में आगे कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून के तहत जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उन्हें भी न्यूनतम योग्यता पूरी करनी ही होगी। इसे कानून को पीछे से लागू करने जैसा नहीं माना जा सकता।
शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर, राज्यों को नियमित परीक्षा कराने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और संबंधित संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे TET परीक्षा नियमित रूप से आयोजित करें। अदालत ने सुझाव दिया कि साल में कम से कम दो बार, लगभग छह महीने के अंतराल पर परीक्षा कराई जाए, ताकि सभी योग्य शिक्षकों को अवसर मिल सके।
पुनर्विचार याचिकाएं खारिज, पुराना फैसला बरकरार
सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए न्यूनतम योग्यता जरूरी है। कोर्ट ने यह भी माना कि अगर बिना TET के शिक्षकों को सेवा में बनाए रखा गया, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों की शिक्षा पर पड़ सकता है।
