एशियाई खेल ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, विनेश फोगाट को मिली राहत

विनेश फोगाट

भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 30 और 31 मई को होने वाले ट्रायल में भाग लेने की इजाजत दे दी। साथ ही कोर्ट ने रेस्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) की याचिका पर नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 1 जून तय की है।

“देश पहले है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विनेश फोगाट कोई सामान्य खिलाड़ी नहीं हैं और उन्होंने देश के लिए कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन खेल नियमों और राष्ट्रीय हित को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि ट्रायल अगले ही दिन होने के कारण उन्हें रोकना उचित नहीं होगा, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश और पूरी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल मौजूद हैं, जिनका जवाब देना होगा।

कोर्ट ने उठाए डोपिंग और प्रक्रिया से जुड़े सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान विनेश फोगाट की खेल गतिविधियों और चयन प्रक्रिया में भागीदारी को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि दिसंबर 2024 में ब्रेक लेने के बाद उन्होंने डोपिंग टेस्ट में हिस्सा नहीं लिया और अपनी लोकेशन की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई। बाद में विधानसभा की कार्यवाही में व्यस्त होने का कारण बताया गया, जिसे स्वीकार नहीं किया गया।

“मई में अचानक सक्रिय हुईं” — कोर्ट

कोर्ट ने यह भी कहा कि फरवरी 2026 से एशियन गेम्स चयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, जिसमें खिलाड़ियों के लिए चार प्रतियोगिताओं में भाग लेना अनिवार्य था। विनेश फोगाट ने इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं लिया और मई में सक्रिय होकर अदालत का रुख किया। सुप्रीम Court ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों और भारतीय खेल प्रणाली के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

WFI ने हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट को ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दी थी, जिसके खिलाफ WFI ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। संघ का कहना है कि चयन प्रक्रिया और नियम सभी खिलाड़ियों के लिए समान हैं और किसी को विशेष छूट देना खेल व्यवस्था के लिए गलत संदेश होगा।

मां बनने के बाद वापसी की दलील

विनेश फोगाट की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में कहा कि एक खिलाड़ी, जो एक साल पहले मां बनी है, सिर्फ ट्रायल में हिस्सा लेने का अवसर मांग रही है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भावनात्मक पहलू अपनी जगह है, लेकिन खेल नियम और प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

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