Iran-US Talks: ईरान-अमेरिका डील से बाहर हुआ पाकिस्तान, अब इस अमीर मुस्लिम देश की एंट्री; हाथ से गया जंग बंद कराने का मेडल!
Iran-US Talks: दोहा में चल रही अहम बातचीत पर दुनिया की नजर, युद्धविराम से लेकर तेल व्यापार तक कई मुद्दों पर बन रही सहमति
Iran-US Talks in Qatar: जिस बातचीत का श्रेय पाकिस्तान लेना चाहता था, अब उसी में एक नया खिलाड़ी सामने आ गया है। कतर की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच बड़ी डील की चर्चा तेज हो गई है। क्या अब युद्धविराम होगा? क्या तेल बाजार फिर सामान्य होगा? और आखिर क्यों अरबों डॉलर की संपत्ति इस समझौते की सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है? जानिए पूरी कहानी…
Iran-US Talks: ईरान-अमेरिका बातचीत में कतर की एंट्री, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल, बड़ी डील की बढ़ी उम्मीद
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब एक नई कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही महत्वपूर्ण बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है। कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत जारी है और माना जा रहा है कि अगर सब कुछ सही दिशा में आगे बढ़ा तो जल्द ही एक बड़ा समझौता सामने आ सकता है।
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे ज्यादा चर्चा कतर की भूमिका को लेकर हो रही है। पहले इस मध्यस्थता में पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका की चर्चा थी, लेकिन अब तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
कई अहम मुद्दों पर बन रही सहमति
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि अगर समझौता होता है तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से बना तनाव कम हो सकता है।

इस बातचीत में 60 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव, समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने और ईरानी तेल निर्यात को लेकर भी चर्चा की जा रही है। इसके अलावा भविष्य में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर आगे बातचीत जारी रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
यदि यह समझौता सफल होता है तो इसका असर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
इस पूरी बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है।
दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। अगर यहां तनाव कम होता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है तो वैश्विक बाजारों में भी राहत देखने को मिल सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने पर भी चर्चा हुई है। साथ ही व्यापारिक जहाजों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने और समुद्री गतिविधियों को पहले की तरह सामान्य करने पर भी विचार किया जा रहा है।
अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्ति बनी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि बातचीत के बीच सबसे बड़ी अड़चन ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियां बनी हुई हैं।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अंतिम समझौते से पहले उसकी कुछ ब्लॉक की गई संपत्तियों को जारी किया जाना जरूरी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान शुरुआती चरण में लगभग 12 अरब डॉलर तक पहुंच की मांग कर रहा है।
दूसरी ओर अमेरिका की तरफ से यह कहा गया है कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम को नष्ट किया जाए या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत इसे खत्म किया जाए।
हालांकि ईरान ने इस पर पूरी सहमति नहीं जताई है और कहा है कि इस मुद्दे पर चरणबद्ध तरीके से बातचीत की जाएगी।
पाकिस्तान की जगह कतर कैसे बना मुख्य मध्यस्थ?
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर पाकिस्तान की जगह कतर कैसे मुख्य भूमिका में आ गया।
जानकारी के अनुसार, पहले दौर की बातचीत में पाकिस्तान और तुर्की सक्रिय थे और इस्लामाबाद में भी बातचीत कराने की कोशिश हुई थी। लेकिन उस स्तर पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान को यह संदेह था कि पाकिस्तान अमेरिका की ओर से बातचीत कर रहा है, जबकि अमेरिका की तरफ से भी पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल थे। यही कारण माना जा रहा है कि अब कतर ने मध्यस्थता की जिम्मेदारी संभाली है।
फिलहाल दोनों देशों की तरफ से किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोहा में चल रही यह बातचीत दुनिया भर की नजरों का केंद्र बनी हुई है।
