ना चुनाव लड़ेंगे, ना सरकार बनाएंगे… फिर क्यों वायरल हो रही ये पार्टी? जानिए कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल होने की क्या है शर्तें?
CJI की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी के बाद शुरू हुआ यह व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है।
अंधेरी रात में जब पूरा सिस्टम सड़ चुका हो, नौकरियाँ गायब हों, सपने टूट रहे हों और युवा लैपटॉप पर भड़ास निकाल-निकालकर थक चुके हों, तब अचानक एक नया ‘मसीहा’ निकल आया। लोग उसे शहंशाह नहीं, कॉकरोच कह रहे हैं। जी हाँ, स्वागत कीजिए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का!
16 मई को जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने “कॉकरोच” और “परजीवी” कहकर तंज कसा, उसी दिन बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस पढ़ रहे अभिजीत डिपके ने X (पूर्व ट्विटर) पर ऐलान कर दिया “चलो भाई, कॉकरोच जनता पार्टी जॉइन कर लो!”। CJI साहब ने बाद में सफाई दी कि टिप्पणी बेरोजगार युवाओं के लिए नहीं थी, लेकिन आग लग चुकी थी। युवाओं ने कहा “ठीक है साहब, अगर सिस्टम हमें कॉकरोच मानता है तो हम उसी रूप में उसकी छाती पर मूँग दलेंगे!”
सिस्टम की नाकामी का सबसे मजेदार जवाब
अभिजीत डिपके, जो 2020-23 तक आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में वॉलंटियर भी रह चुके हैं, अब एकदम नया रास्ता चुन लिया है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे लोकतंत्र में CJI जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति युवाओं को कॉकरोच कहे, ये स्वीकार्य नहीं।” और फिर क्या, पार्टी बन गई। मकसद? चुनाव लड़ना नहीं। सिर्फ़ व्यंग्य के जरिए सिस्टम की पोल खोलना।
पार्टी की सदस्यता के लिए शर्तें बेहद आसान और दिलचस्प हैं
पहली योग्यता: बेरोजगार होना (डिग्री हो या न हो, जॉब न हो तो वेलकम)।
दूसरी: आलसी होना – डले रहो, पड़े रहो, स्क्रॉल करते रहो।
तीसरी: ऑनलाइन लत- रील देखते-देखते सुबह हो जाए।
चौथी: प्रोफेशनली भड़ास निकालने की कला।
पार्टी की टैगलाइन है “आलसी और बेरोजगारों की आवाज”। वेबसाइट पर लिखा है: “हम ना पीएम केयर्स की नई स्कीम लाने आए हैं, ना टैक्सपेयर्स के पैसे से दावोस में छुट्टियाँ मनाने। हम सिर्फ़ एक सवाल पूछने आए हैं पैसा गया कहाँ?”
मजाक मजाक में छोड़ दिए बड़े तीर
मोदी सरकार पर व्यंग्य करते हुए CJP कहती है कि 10 साल में “अमृतकाल” तो आ गया लेकिन नौकरियाँ कहाँ गायब हो गईं? हर साल लाखों युवा डिग्री लेकर सड़कों पर घूम रहे हैं। “स्किल इंडिया” के नाम पर करोड़ों खर्च हुए, लेकिन स्किल वाले युवा अभी भी Uber चलाने को मजबूर हैं। रेलवे, SSC, UPSC में पेपर लीक का तहखाना बन गया है। एक तरफ़ “विकसित भारत” के पोस्टर, दूसरी तरफ़ युवा आत्महत्या के कगार पर। सरकार कहती है “रोजगार आ रहा है”, युवा पूछते हैं “कहाँ भाई? LinkedIn पर ghosting तो रोज आ रहा है!”
CJP का कहना साफ है, सारा सिस्टम नेताओं, कॉरपोरेट्स और मीडिया के गठजोड़ ने युवाओं को परजीवी बना दिया है। बड़े-बड़े चैनल प्राइम टाइम पर “राष्ट्रवाद” बेचते हैं, लेकिन युवा बेरोजगारी पर चुप। कॉरपोरेट्स प्रॉफिट कमाते हैं, लेकिन नौकरियाँ आउटसोर्स या AI को सौंप देते हैं। और सरकार? बस नई-नई योजनाओं के नाम पर वोट मांगती है।
CJP का मैनिफेस्टो…
पार्टी का मैनिफेस्टो मात्र पाँच वादों का है, लेकिन हर वादा सिस्टम की कमर तोड़ने वाला
1. CJI रिटायरमेंट पर राज्यसभा का इनाम बंद
अब जज साहबान रिटायर होकर राजनीति में कूदने की बजाय सचमुच न्याय करते दिखें।
2. वोट डिलीट करने पर CEC को UAPA
वोट चोरी आतंकवाद से कम नहीं। अगर EVM में गड़बड़ी हुई तो सीधे ED-CBI का चक्कर!
3. महिलाओं को 50% आरक्षण
न 33%, बल्कि आधा। संसद की सीटें बढ़ाए बिना। कैबिनेट में भी 50%। (पुरुषों को अब “सशक्तिकरण” की जरूरत पड़ेगी!)
4. गॉड मीडिया के लाइसेंस रद्द, एंकरों के अकाउंट जांच
जो चैनल दिन-रात झूठ बेचते हैं, उनका हिसाब होगा।
5. दल-बदलू पर 20 साल की पाबंदी
पाला बदलोगे तो अगले 20 साल तक कोई पद नहीं। बस घर बैठकर “राष्ट्र सेवा” करो।
इस डिजिटल मुहिम ने महज 5 दिनों में लाखों लोगों का ध्यान खींच लिया है। बुधवार शाम तक पार्टी के इंस्टाग्राम पर 63 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके थे जबकि X पर यह आंकड़ा करीब 1.26 लाख तक पहुंच गया। तुलना करें तो इंस्टाग्राम पर भाजपा के करीब 87 लाख और कांग्रेस के लगभग 1.32 करोड़ फॉलोअर्स हैं।
कॉकरोच बनने पर गर्व क्यों?
अभिजीत कहते हैं, “कॉकरोच हालात के हिसाब से खुद को ढाल लेता है। आज का युवा भी वही कर रहा है IIT, IIM की डिग्री लेकर भी छोटी-मोटी नौकरी या फ्रीलांसिंग पर मजबूर।” पार्टी खुद को गांधी, आंबेडकर और नेहरू से प्रेरित बताती है धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक और जाति-विरोधी। लेकिन असल में ये निराशा का विद्रोह है।
सिस्टम युवाओं को देख नहीं रहा, उनकी बात नहीं सुन रहा, उनकी सेवा नहीं कर रहा। नतीजा? लाखों युवा फ्रस्ट्रेटेड। कुछ आत्महत्या कर रहे हैं, कुछ विदेश भाग रहे हैं, कुछ ऑनलाइन क्रांति कर रहे हैं। CJP उसी क्रांति का हास्य रूप है।
हास्य में छिपा गहरा मर्म
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी सिस्टम को आईना दिखा रही है। जब न्यायपालिका के प्रमुख युवाओं को परजीवी कहें, सरकार रोजगार के आंकड़े फर्जी पेश करे, विपक्ष सिर्फ़ सत्ता के लिए रोये और मीडिया चुप बैठा हो, तब व्यंग्य ही सबसे ताकतवर हथियार बचता है।
ये पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही, लेकिन सवाल पूछ रही है
- 8-10% GDP ग्रोथ के बावजूद युवा बेरोजगारी क्यों?
- हर साल लाखों सरकारी पद खाली क्यों पड़े हैं?
- NEP, Skill India, Startup India के बाद भी युवा क्यों हताश हैं?
- टैक्सपेयर्स का पैसा स्कीमों में कहाँ गायब हो जाता है?
CJP का संदेश साफ है “हम कॉकरोच हैं, हमें कुचलना मुश्किल है। हम हर दरार से निकल आएंगे। हम आलसी नहीं, थके हुए हैं। हम परजीवी नहीं, वो सिस्टम है जो हमारी मेहनत का खून चूस रहा है।”
अब देखना यह है कि यह व्यंग्य का तूफान कितना बड़ा बनता है। क्या सरकार और विपक्ष दोनों इसे हल्के में लेंगे? या आखिरकार मजबूर होकर युवाओं की आवाज सुननी पड़ेगी?
कॉकरोच जनता पार्टी.. ना सत्ता चाहिए, ना कुर्सी। सिर्फ़ एक जोरदार सवाल “अब और कितना सह लें भाई?”
