खाद्य सुरक्षा जांच बनी औपचारिकता: गर्मी के साथ गन्ना जूस सेंटरों की लापरवाही भी बढ़ी, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
लोगों को शुद्ध और सुरक्षित आहार उपलब्ध कराने तथा व्यापारियों को जागरूक करने के लिए चलाया गया 15 दिन का खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का विशेष अभियान अब केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। अभियान समाप्त होने के बाद विभाग की सक्रियता लगभग खत्म हो गई है, जिससे खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जूस सेंटरों की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल
गर्मी के मौसम में शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क किनारे लगे गन्ने के रस और फलों के जूस सेंटरों पर साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। धूल, मिट्टी और मक्खियों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं, जिससे इन स्थानों पर बिकने वाले पेय पदार्थों के स्वास्थ्य पर असर डालने की आशंका बढ़ गई है।
30 रुपये में बिक रहा गन्ना रस, मानकों पर उठे सवाल
सड़क किनारे 30 रुपये प्रति गिलास तक बिकने वाले गन्ने के रस में उपयोग होने वाली बर्फ और स्वच्छता मानकों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बिना उचित साफ-सफाई के तैयार किए जा रहे ये पेय पदार्थ बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
अभियान के दौरान लिए गए सैंपल की रिपोर्ट लंबित
अभियान के दौरान समोसा, चाट, दही बड़ा और अन्य खाद्य पदार्थों के कई सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे, लेकिन 10 दिन बीतने के बाद भी उनकी रिपोर्ट सामने नहीं आई है। इसी दौरान कई दुकानों से एक्सपायरी खाद्य सामग्री भी जब्त कर नष्ट कराई गई थी।
औपचारिकता बनकर रह गया अभियान
27 अप्रैल से 11 मई तक चले इस अभियान के दौरान टीमों ने विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण कर सैंपल एकत्र किए और व्यापारियों को साफ-सफाई बनाए रखने की हिदायत दी थी। लेकिन अभियान खत्म होने के बाद न तो नियमित जांच हो रही है और न ही जूस और स्ट्रीट फूड की निगरानी पर कोई विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
निगरानी की कमी से बढ़ा खतरा
वर्तमान में गर्मी के मौसम में शहर भर में बड़ी संख्या में जूस सेंटर संचालित हो रहे हैं, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी कमजोर पड़ने से इन पर नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। इससे आम लोगों के स्वास्थ्य को खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
