Rupee Fall: गिरता रुपया और सरकार का नया दांव! विदेश भेजे जाएंगे लाखों भारतीय?
Rupee Fall: गिरते रुपये और बढ़ते तेल संकट के बीच सरकार का नया प्लान, विदेशों में भारतीय स्किल्ड वर्कर्स भेजकर मजबूत होगा रेमिटेंस नेटवर्क
Rupee Fall: रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और पहली बार 96 के पार पहुंच गया है। ऐसे में सरकार अब एक नई रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें लाखों भारतीयों को विदेश भेजकर विदेशी मुद्रा जुटाने की तैयारी है। क्या इससे रुपया संभल पाएगा? पूरी कहानी जानिए।
रुपये पर बढ़ता दबाव, क्या विदेशों में भारतीय टैलेंट बनेगा नई ताकत?
Rupee Fall: भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.47 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपये की इस कमजोरी के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। तेल आयात पर निर्भर भारत के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव को और बढ़ा सकती है। इसी बीच सरकार अब एक ऐसी रणनीति पर तेजी से काम करती दिखाई दे रही है, जो सिर्फ रोजगार ही नहीं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने का काम कर सकती है।
सरकार की यह नई रणनीति भारतीय स्किल्ड वर्कफोर्स को दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजने की है, ताकि विदेशों से आने वाला रेमिटेंस यानी विदेशी मुद्रा का प्रवाह और मजबूत हो सके।
विदेशी मुद्रा जुटाने का नया रास्ता
भारत लंबे समय से दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में शामिल रहा है। दूसरी तरफ कई विकसित देशों के सामने सबसे बड़ी चुनौती काम करने वाले लोगों की कमी है। ऐसे में भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर बन सकता है।
सरकार का मानना है कि अगर बड़ी संख्या में प्रशिक्षित भारतीय विदेशों में रोजगार हासिल करते हैं, तो इससे दो फायदे होंगे। पहला, युवाओं को रोजगार मिलेगा और दूसरा, विदेशों से भारत आने वाली विदेशी मुद्रा बढ़ेगी। यही विदेशी मुद्रा रुपये पर बढ़ रहे दबाव को कम करने में मदद कर सकती है।
विदेशों में काम करने वाले भारतीय हर साल अरबों डॉलर अपने परिवारों और देश में भेजते हैं। यही पैसा आर्थिक संकट के समय भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित होता है।
अब अमेरिका नहीं, नए देशों की तरफ बढ़ रहे भारतीय
कुछ साल पहले तक भारतीय युवाओं का सपना अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप जैसे देशों में नौकरी हासिल करना होता था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। इन देशों में वीजा नियम लगातार सख्त हो रहे हैं और इमिग्रेशन की प्रक्रिया भी कठिन होती जा रही है।
इसी वजह से भारतीय युवाओं का रुख अब नए देशों की तरफ बढ़ रहा है। जापान, रूस और इजरायल जैसे देशों में स्किल्ड वर्कर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इजरायल देगा 50 हजार भारतीयों को रोजगार
फिलहाल सरकार का सबसे ज्यादा फोकस इजरायल पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के बाद अगले पांच सालों में लगभग 50 हजार भारतीयों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इन कर्मचारियों की जरूरत मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, रेस्टोरेंट इंडस्ट्री और कई अन्य क्षेत्रों में होगी। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) को दी गई है।
रूस में भी खुलेगा रोजगार का बड़ा बाजार
रूस भी आने वाले समय में भारतीयों के लिए बड़ा रोजगार केंद्र बन सकता है। रूस को मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेक्टर में लाखों कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है।
रूस ने विदेशी विशेषज्ञों के लिए वीजा नियम आसान करने के साथ-साथ रोजगार कोटा भी बढ़ाना शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ रूस जा सकते हैं।
जापान में भी भारतीयों के लिए नए अवसर
जापान तेजी से बूढ़ी होती आबादी की समस्या से जूझ रहा है। वहां काम करने वाले लोगों की कमी लगातार बढ़ रही है। इसी कारण जापान ने अपनी पुरानी सख्त इमिग्रेशन नीति में कुछ राहत दी है।
भारत और जापान के बीच हुए समझौते के तहत अगले पांच वर्षों में लाखों लोगों की आवाजाही बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। खास तौर पर हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी और केयरगिविंग सेक्टर में भारतीय युवाओं को मौका मिल सकता है।
रेमिटेंस बना भारत की सबसे बड़ी ताकत
विदेशों में काम कर रहे भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत को लगभग 135.4 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला, जो दुनिया में सबसे अधिक माना गया। दिलचस्प बात यह है कि यह रकम कई बार देश में आने वाले विदेशी निवेश (FDI) से भी ज्यादा होती है।
सरकार अब इसे सिर्फ रोजगार नहीं बल्कि आर्थिक सुरक्षा की रणनीति के रूप में देख रही है। अगर यह योजना सफल होती है तो भारत सिर्फ दुनिया का बैक ऑफिस नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया का सबसे भरोसेमंद स्किल्ड वर्कफोर्स सप्लायर भी बन सकता है।
