आर्थिक तूफान सिर पर है और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफी बांट रहे हैं… राहुल गांधी को रास नहीं आया मेलोडी का साथ?
इटली दौरे के दौरान पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी का मेलोडी टॉफी वाला वीडियो वायरल होने के बाद राहुल गांधी ने निशाना साधा।
इटली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट थमाकर हंसी-मजाक कर रहे हैं, तो राहुल गांधी देश में “आर्थिक तूफान” का राग अलाप रहे हैं। वायरल वीडियो में दोनों नेता “मेलोडी” बोलकर खुलकर हंस रहे हैं, लेकिन कांग्रेस नेता इसे देखकर इतने बौखला गए कि तुरंत एक्स पर पोस्ट मार दिया “यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है!”
राहुल गांधी ने लिखा: “आर्थिक तूफान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफी बांट रहे हैं! किसान, युवा, महिलाएं, मजदूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं पीएम हंसकर रील बना रहे हैं, और भाजपा वाले ताली बजा रहे हैं।”
आर्थिक तूफ़ान सर पर है, और हमारे प्रधानमंत्री इटली में टॉफ़ी बाँट रहे हैं!
किसान, युवा, महिलाएँ, मज़दूर और छोटे व्यापारी सब रो रहे हैं – PM हंसकर रील बना रहे हैं, और BJP वाले ताली बजा रहे हैं।
यह नेतृत्व नहीं, नौटंकी है।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 20, 2026
राहुल का रोना-धोना, लेकिन सवाल भी
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मोदी ने पिछले तीन महीनों में सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए कुछ नहीं किया, बस टॉफी खा रहे हैं। लेकिन विपक्षी नेता पर भी सवाल उठ रहे हैं भाई साहब, आप खुद पिछले 10 साल से यही तो कर रहे हैं ना? हर मुद्दे पर “चुप्पी” या “नौटंकी” का आरोप लगाकर पोस्ट मारना, फिर विदेश जाकर लेक्चर देना और घर आकर “सब रो रहे हैं” का गाना गाना।
हास्यास्पद ये है कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो “भारत जोड़ो” यात्रा की ब्रांडिंग करते हैं, लेकिन मोदी जब विदेश जाते हैं और हल्का-फुल्का पल लेते हैं तो “नौटंकी” हो जाता है। शायद राहुल जी को लगता है कि प्रधानमंत्री को विदेश में भी उदास चेहरा बनाकर घूमना चाहिए, जैसे कोई परीक्षा में फेल होकर लौट रहा हो।
टॉफी डिप्लोमेसी पर राजनीतिक तमाशा
मेलोनी ने खुद वीडियो शेयर कर कहा “बहुत अच्छी टॉफी है!” दोनों नेता हंस-हंसकर रील बना रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में मजाक चल रहा है कि अब शायद सरकार “मेलोडी टॉफी” को आत्मनिर्भर भारत का नया प्रतीक बना दे। घर में महंगाई है, लेकिन विदेश में स्वीट डिप्लोमेसी!
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दूसरी तरफ राहुल गांधी का अंदाज़ देखकर लगता है जैसे देश की हर समस्या का समाधान सिर्फ मोदी की तस्वीर पर हमला करने में है। किसानों की समस्या, युवाओं की बेरोजगारी, महंगाई सब पर राहुल जी का एक ही जवाब: “मोदी हंस रहे हैं, इसलिए सब खराब है।”
क्या राहुल गांधी को लगता है कि अगर मोदी रोते हुए इटली गए होते तो आर्थिक तूफान अपने आप रुक जाता? या टॉफी की जगह कोई भारी-भरकम फाइल देकर मेलोनी को “अब बताओ अर्थव्यवस्था कैसे सुधारे” पूछ लेते?
दोनों तरफ का ड्रामा
मोदी की यात्रा व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी पर केंद्रित थी, लेकिन टॉफी वाला वीडियो वायरल होने के बाद पूरा फोकस हल्के-फुल्के वाले हिस्से पर आ गया। राहुल गांधी इसे निशाना बनाने में जुट गए, जबकि खुद कांग्रेस शासनकाल में अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और किसानों की हालत क्या थी, यह याद दिलाने की जरूरत शायद उन्हें नहीं है।
अंत में एक बात साफ है… राजनीति अब टॉफी और तूफान के बीच अटक गई है। मोदी हंसकर डिप्लोमेसी कर रहे हैं, राहुल रोकर क्रिटिसिज्म। जनता दोनों के इस ड्रामे को देख रही है और सोच रही है आखिर कब असली काम की बात होगी?
