पीएम ने कहा पेट्रोल बचाओ.. तो 500 गाड़ियों का काफिला लेकर निकल पड़े नेता जी! जनता को बचत का ज्ञान… VIP कर रहे ताकत की नुमाइश?
सौभाग्य सिंह ठाकुर का भारी-भरकम काफिला भोपाल पहुंचा, कांग्रेस चिल्लाई ‘दोगलापन’, संकट में भी VIP कल्चर का जलवा, आम आदमी का मजाक!
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश को समझा रहे हैं “भाइयों-बहनों, पेट्रोल कम जलाओ, बस-मेट्रो में बैठो, घर से काम करो, वरना वैश्विक तूफान हमें डुबो देगा!” और उधर मध्य प्रदेश में भाजपा के नवनिर्वाचित पदाधिकारी उज्जैन से भोपाल तक 500 गाड़ियों का धूल उड़ाता काफिला लेकर पहुंच रहे हैं, जैसे कोई राजकीय शोभा यात्रा हो। सौभाग्य सिंह ठाकुर पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष बनकर आए, लेकिन उनके साथ इतनी गाड़ियां आईं कि लग रहा था पूरा उज्जैन शहर ही शिफ्ट हो रहा है!
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही विपक्षी चैनल गर्म हो गए। कांग्रेस ने तुरंत हमला बोल दिया “प्रधानमंत्री की अपील आम जनता के लिए है या सिर्फ ‘आम’ के लिए?” पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा ने व्यंग्य कसते हुए कहा, “लगता है पीएम की बात अब उनके अपने भक्त भी नहीं सुन रहे। नेता तो काफिले में राज करेंगे, जनता बस में ठसाठस यात्रा करे।” राहुल गांधी ने तो सीधे निशाना साधा – “12 साल बाद जनता को बताना पड़ रहा है कि क्या खरीदो, क्या न खरीदो। ये त्याग नहीं, नाकामी का प्रमाण-पत्र है!”
पीएम कह रहे हैं “कारपूलिंग करो”, और नेता 500 गाड़ियों में कार का पूल बना लाए! ट्रैफिक जाम तो लगा ही, साथ में राजनीतिक जाम भी!
वीडियो से फैली आग, नेताओं का उल्टा पल्ला
जब वीडियो ने तहलका मचा दिया तो भाजपा के तेवर अचानक बदले। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर अपने बंगले से मंत्रालय तक स्कूटी पर सवार हो गए हेलमेट लगाए, जैसे कोई आम छात्र। लघु उद्योग निगम के नए अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह ई-रिक्शा से पदभार ग्रहण करने पहुंचे। देखकर लग रहा था, “कल काफिला, आज इको-फ्रेंडली! फोटो खिंचवा लो, वायरल हो जाएगा।”
मंत्री गौतम टेंटवाल ने तो पूरा इनकार कर दिया “कोई काफिला नहीं था, कांग्रेस भ्रम फैला रही है।” लेकिन वीडियो तो वीडियो है, उसे एडिट कैसे कहें जब हजारों आंखें देख चुकी हैं? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संयम बरतते हुए कहा, “सभी को पीएम की अपील माननी चाहिए।” मतलब.. अब माननी पड़ेगी, पहले तो शक्ति प्रदर्शन पूरा हो चुका था!
जब नेता खुद 500 गाड़ियों का काफिला निकाल रहे हों, तो जनता से “त्याग” की अपील कितनी बेतुकी और हास्यास्पद लगती है!
पीएम मोदी की अपील
प्रधानमंत्री ने ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव को देखते हुए साफ कहा.. पेट्रोल-डीजल बचाओ, अनावश्यक यात्राएं कम करो, EV अपनाओ, WFH करो। भारत 85% तेल आयात करता है। होर्मुज स्ट्रेट में आग लगी तो हमारी जेब जलनी तय है। छत्तीसगढ़ सरकार ने ईंधन कटौती के संकेत दिए, कई राज्यों में सरकारी वाहनों पर नजर।
यह अपील कोई कमजोरी नहीं, बल्कि दूरदर्शिता है। लेकिन जब खुद सत्ता पक्ष के लोग काफिले निकालेंगे तो अपील का वजन कहां रह जाता है? विपक्ष हंस-हंसकर कह रहा है “सरकार खुद ही अपनी अपील का उल्लंघन कर रही है।”
कांग्रेस ने लपका तंज कसने का मौका
कांग्रेस इस मौके पर पूरी तरह से लूट रही है। मायावती ने कहा कि यह आर्थिक संकट का संकेत है।
राहुल गांधी ने सीधा निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे.. सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं।”
राहुल ने आगे कहा, “12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।”
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे – सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं – ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है – क्या ख़रीदे, क्या न…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 11, 2026
लेकिन याद कीजिए, कांग्रेस के राज में काफिले कितने बड़े होते थे? हेलीकॉप्टर घूमते थे, सरकारी बंगले पार्टियों के लिए इस्तेमाल होते थे।

विपक्ष तो हमेशा तैयार रहता है.. भाजपा गलती करे तो “दोगले!”, खुद करें तो “लोकतंत्र की रक्षा!”। दोनों पार्टियां आम आदमी को “त्याग” का उपदेश देती हैं, लेकिन खुद VIP लेन में दौड़ती हैं। आम जनता दोनों को देखकर कह रही है “सब बराबर हैं, बस कुर्सी बदलती रहती है।”
सरकार की थोड़ी तारीफ होनी चाहिए?
ईरान पर हमलों के बीच भारत ने संतुलित भूमिका निभाई। न अमेरिका-इजराइल से रिश्ते खराब किए, न ईरान से तेल का रास्ता बंद किया। विदेश नीति की इस समझदारी की तारीफ करनी होगी। सरकार ने EV को बढ़ावा दिया, सौर ऊर्जा पर जोर दिया, और जनता से सहयोग मांगा।
लेकिन घरेलू मोर्चे पर चूक हुई। जब पूरा देश महंगाई से जूझ रहा है, पेट्रोल 100 के पार जा रहा है, तब नेता 500 गाड़ियों का काफिला निकालें तो गुस्सा तो फूटेगा ही। किसान, मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारी सब प्रभावित हो रहे हैं। शादियां टाल रहे हैं, विदेश यात्राएं रद्द कर रहे हैं, लेकिन नेता जी का शो चल रहा है।
सोशल मीडिया पर बने मीम्स
सोशल मीडिया पर मीम्स उड़ रहे हैं “नेता स्कूटी पर आए, लेकिन उनके पीछे 10 गाड़ियां सुरक्षा में!” एक यूजर ने लिखा, “500 गाड़ियां = 500 लीटर पेट्रोल बर्बाद। पीएम साहब, इनको WFH का सुझाव दो, पदभार ऑनलाइन ग्रहण कर लें।”
आम आदमी सच में परेशान है। एक तरफ बिल बढ़ रहे हैं, दूसरी तरफ नेता शक्ति प्रदर्शन। यह घटना सिर्फ भोपाल की नहीं, पूरे देश की VIP संस्कृति की तस्वीर है।
अब उदाहरण चाहिए, तमाशा नहीं
यह विवाद हास्यास्पद भी है और चिंताजनक भी। भाजपा को अपनी छवि सुधारनी होगी। अगर पीएम की अपील को गंभीरता से लेना है तो सबसे पहले अपने नेताओं को काबू में रखो। कांग्रेस को भी सिर्फ हमला नहीं, समाधान देना चाहिए।
नेता जी, अगली बार पदभार ग्रहण करने साइकिल से आना। जनता तालियां बजाएगी और पेट्रोल भी बचेगा। संकट की इस घड़ी में सच्चा शक्ति प्रदर्शन त्याग से होगा, काफिले से नहीं।
Read More: ‘1 साल तक सोना न खरीदें’, पेट्रोल संकट के बीच पीएम मोदी की बड़ी अपील
