TMC Supreme Court Petition: ‘SIR’ से प्रभावित हुए बंगाल चुनाव नतीजे? हार-जीत के आंकड़ों के साथ बड़ा दावा

TMC Supreme Court Petition

TMC Supreme Court में दावा किया कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों ने कई सीटों के चुनाव परिणाम बदल दिए

क्या सच में वोटर लिस्ट से नाम हटने की वजह से बदल गए बंगाल चुनाव के नतीजे? TMC Supreme Court में ऐसे आंकड़े पेश किए हैं जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आखिर क्या है पूरा मामला और चुनाव आयोग ने क्यों खारिज किए आरोप? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

TMC Supreme Court: SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची टीएमसी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर TMC Supreme Court में बड़ा दावा किया है। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ा।

यह मामला सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने सुनवाई के दौरान उठा।

‘31 सीटों पर असर पड़ा’ : टीएमसी का दावा

टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत में कहा कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर भाजपा की जीत का अंतर उन वोटरों की संख्या से कम था, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए।

उन्होंने अदालत में उदाहरण देते हुए कहा कि एक सीट पर टीएमसी उम्मीदवार केवल 862 वोटों से हारा, जबकि वहां 5,432 वोटरों के नाम जांच के लिए हटाए गए थे।

टीएमसी का दावा है कि पार्टी और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था, जबकि करीब 35 लाख अपीलें अब भी लंबित हैं।

चुनाव आयोग ने आरोपों को किया खारिज

भारत के चुनाव आयोग ने टीएमसी के दावों का विरोध करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वोटर हटाए गए, वहां भी टीएमसी ने जीत दर्ज की।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुजापुर, रघुनाथगंज, समसेरगंज, रतुआ और सूती जैसी सीटों पर बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए थे, लेकिन इन सभी सीटों पर टीएमसी उम्मीदवार विजयी रहे।

चुनाव आयोग के अनुसार भाजपा ने राज्य की 294 में से 207 सीटों पर जीत हासिल की।

TMC Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य पक्ष इस मामले में नई याचिका दाखिल कर सकते हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वोटर हटाए जाने से चुनाव परिणाम प्रभावित हुए हैं, तो इस मुद्दे पर अलग से सुनवाई संभव है।

कोर्ट ने लंबित अपीलों पर चिंता जताते हुए कहा कि मामलों का जल्द निपटारा जरूरी है।

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‘चार साल लग सकते हैं’ : मेनका गुरुस्वामी

वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि मौजूदा रफ्तार से लंबित अपीलों के निपटारे में करीब चार साल का समय लग सकता है।

इस टिप्पणी के बाद अदालत ने अपीलों के तेजी से निपटारे की जरूरत पर जोर दिया।

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