मदर्स डे पर महिला बंदियों को बड़ा तोहफा, वीडियो कॉलिंग सुविधा शुरू

मदर्स डे पर महिला बंदियों को बड़ा तोहफा

रायपुर सेंट्रल जेल में बंद महिला कैदियों के लिए मदर्स डे के अवसर पर एक नई सुविधा की शुरुआत की गई है। जेल प्रशासन ने “प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम” लागू किया है, जिसके जरिए अब महिला बंदी अपने परिवार और वकीलों से वीडियो कॉल पर बातचीत कर सकेंगी। इस पहल का उद्देश्य महिला बंदियों को मानसिक सहारा देना और उनके परिजनों से संपर्क को आसान बनाना है।

यह सुविधा फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रायपुर सेंट्रल जेल में शुरू की गई है। राज्य सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इसे प्रदेश की अन्य प्रमुख जेलों में भी लागू किया जाए। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और जगदलपुर की सेंट्रल जेलों में भी यह व्यवस्था शुरू होगी।

गृहमंत्री की पहल पर शुरू हुई व्यवस्था

प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा की पहल पर यह नई सुविधा शुरू की गई है। जेल विभाग और बीएसएनएल के बीच हुए समझौते के तहत इस सिस्टम को तैयार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य जेल व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और बंदियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही जिला जेलों में महिला बंदियों के लिए ऑडियो कॉलिंग सुविधा शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।

तय प्रक्रिया के तहत होगी वीडियो कॉल

वीडियो कॉलिंग का उपयोग करने के लिए महिला बंदियों को पहले जेल प्रशासन के पास आवेदन देना होगा। इसके बाद अधिकारियों द्वारा बातचीत का समय निर्धारित किया जाएगा। तय समय के अनुसार महिला बंदी जेल परिसर में बनाए गए विशेष वीडियो कॉलिंग रूम में जाकर अपने परिवार या वकील से बात कर सकेंगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया जेल प्रशासन की निगरानी में होगी। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के दौरान सभी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी ताकि किसी प्रकार की सुरक्षा संबंधी समस्या न हो।

जेल आने वाले परिजनों को मिलेगी राहत

रायपुर सेंट्रल जेल में वर्तमान में लगभग 192 महिला बंदी हैं। इनसे मिलने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में लोग जेल पहुंचते हैं। जानकारी के अनुसार प्रतिदिन 25 से 30 परिजन और करीब 50 वकील महिला बंदियों से मुलाकात के लिए आते हैं।

मुलाकात की समय सीमा करीब 20 मिनट निर्धारित है, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण कई बार लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। कुछ मामलों में परिजनों को बिना मुलाकात किए ही लौटना पड़ता है। ऐसे में वीडियो कॉलिंग सुविधा शुरू होने से परिजनों को काफी राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था से दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले परिवार भी आसानी से संपर्क कर सकेंगे और उन्हें बार-बार जेल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

मदर्स डे पर बच्चों को भी दिए गए उपहार

मदर्स डे के अवसर पर जेल प्रशासन ने विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। जेल में अपनी माताओं के साथ रह रहे 14 बच्चों को उपहार वितरित किए गए। इस दौरान बच्चों और महिला बंदियों के लिए सांकेतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसके अलावा “निश्चय कार्यक्रम” के तहत कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 38 महिला बंदियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। इन महिला कैदियों को विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए गए हैं ताकि वे जेल से बाहर आने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें।

सुधारात्मक व्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

जेल अधिकारियों का मानना है कि यह सुविधा महिला बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने में मदद करेगी। लंबे समय तक परिवार से दूर रहने के कारण कई बंदियां तनाव और अकेलेपन का सामना करती हैं। वीडियो कॉलिंग से उन्हें भावनात्मक सहारा मिलेगा और परिवार से संवाद बनाए रखना आसान होगा। कार्यक्रम में जेल डीजी हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में जेलों में और भी आधुनिक सुविधाएं शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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