Amit Shah on Naxalism: लोकसभा में नक्सलवाद पर घमासान, अमित शाह का कांग्रेस पर बड़ा आरोप, बोले- ‘भूपेश बघेल से पूछो, प्रूफ दूं क्या?’
Amit Shah on Naxalism: देश में नक्सलवाद के मुद्दे पर लोकसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस दौरान वामपंथी उग्रवाद पर सरकार की रणनीति को सामने रखते हुए विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
‘देर इसलिए हुई क्योंकि कांग्रेस की सरकार थी’
अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी रणनीति पहले ही तैयार कर ली गई थी, लेकिन इसके लागू होने में देरी हुई। उन्होंने इसका जिम्मेदार भूपेश बघेल की अगुवाई वाली छत्तीसगढ़ की पूर्व कांग्रेस सरकार को ठहराया।
उन्होंने सदन में कहा, “भूपेश बघेल से पूछो… या प्रूफ दूं क्या?” इस बयान पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।
सरकार की रणनीति और कार्रवाई
गृहमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने CAPF और राज्य पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया, जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया और “ऑल एजेंसी अप्रोच” अपनाई। इसके साथ ही नक्सलियों की फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम पर भी कड़ा प्रहार किया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पुनर्वास योजनाएं शुरू कीं और विकास कार्यों को गांव-गांव तक पहुंचाया, जिससे नक्सलवाद कमजोर पड़ा।
तीन अहम तारीखों का जिक्र
अमित शाह ने 20 अगस्त 2019, 24 अगस्त 2024 और 31 मार्च 2026 की तीन महत्वपूर्ण तारीखों का जिक्र करते हुए बताया कि 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया है।
‘जनताना सरकार’ और टैक्स का खुलासा
शाह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की “जनताना सरकार” चलती थी, जिसमें उनका खुद का गृह, न्याय और खाद्य मंत्रालय होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि माओवादी हर ठेके में 20% “जनताना टैक्स” वसूलते थे और विकास कार्यों में बाधा डालते थे।
बातचीत और कार्रवाई पर स्पष्ट नीति
गृहमंत्री ने साफ कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है, बातचीत उन्हीं से होगी जो हथियार छोड़ेंगे। उन्होंने कहा, “हम गोलियों का जवाब गोलियों से देंगे।”
नक्सलवाद की विचारधारा पर प्रहार
अमित शाह ने नक्सल विचारधारा की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि जहां भारत “सत्यमेव जयते” के सिद्धांत पर चलता है, वहीं नक्सली विचारधारा “सत्ता बंदूक की नली से निकलती है” पर आधारित है।
बिरसा मुंडा का उदाहरण
शाह ने बिरसा मुंडा का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी तुलना नक्सलियों से करना गलत है, क्योंकि उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, न कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ।
सभी दलों से एकजुट होने की अपील
अमित शाह ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेद भुलाकर नक्सलवाद के खिलाफ एकजुट होकर काम करें, ताकि देश को इस समस्या से पूरी तरह मुक्त किया जा सके।
