अब मिनटों में होगी अपराधियों की पहचान: विदिशा में शुरू हुई हाई-टेक फिंगरप्रिंट लैब

विदिशा में शुरू हुई हाई-टेक फिंगरप्रिंट लैब

विदिशा में शुरू हुई हाई-टेक फिंगरप्रिंट लैब

विदिशा: मध्य प्रदेश में अपराध जांच को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य की पहली जिला स्तर की अत्याधुनिक फिंगरप्रिंट प्रयोगशाला विदिशा में स्थापित की गई है। इस प्रयोगशाला के शुरू होने से पुलिस जांच को तकनीकी सहयोग मिलेगा और अपराधियों की पहचान पहले से ज्यादा सटीक तरीके से की जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे जांच प्रक्रिया तेज और विश्वसनीय बनेगी, जिससे आम लोगों को न्याय दिलाने में भी मदद मिलेगी।

NAFIS परियोजना के अंतर्गत तैयार हुई सुविधा

यह प्रयोगशाला केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के अंतर्गत स्थापित की गई है। इस प्रणाली के जरिए पूरे देश में अपराधियों के फिंगरप्रिंट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। डिजिटल डाटाबेस से पुलिस को संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने में आसानी होती है। विदिशा में इस सुविधा के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर ही फिंगरप्रिंट विश्लेषण किया जा सकेगा, जिससे जांच में लगने वाला समय भी कम होगा।

फिंगरप्रिंट तकनीक से कई मामलों का खुलासा

विदिशा जिले में फिंगरप्रिंट तकनीक का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जानकारी के मुताबिक अब तक 117 मामलों में फिंगरप्रिंट के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा चोरी के मामलों में भी इस तकनीक की मदद से बड़ी मात्रा में चोरी का सामान बरामद किया गया है। खासतौर पर ऐसे हत्या के मामलों में जहां शुरुआती दौर में कोई सुराग नहीं मिल पाता, वहां भी फिंगरप्रिंट तकनीक ने पुलिस को अहम सुराग देने में मदद की है।

पुलिस विभाग को मिले अंतरराष्ट्रीय मानक के प्रमाणपत्र

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस विभाग के कई थानों और कार्यालयों को आईएसओ प्रमाणपत्र प्रदान किए। भोपाल ग्रामीण जोन के पुलिस महानिरीक्षक संजय तिवारी और विदिशा के पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी को ये प्रमाणपत्र दिए गए। जिले के 20 पुलिस थानों और 5 पुलिस कार्यालयों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है, जिससे पुलिस सेवाओं को और अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाया जा सके।

दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए तैयार हुआ ‘राहवीर विदिशा’ ऐप

कार्यक्रम में “राहवीर विदिशा” नाम के एक मोबाइल ऐप को विकसित करने वाले युवाओं को भी सम्मानित किया गया। यह ऐप सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। सम्राट अशोक टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (सैटी) के इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा इसे नि:शुल्क विकसित किया गया है। ऐप के माध्यम से दुर्घटना की सूचना मिलते ही मदद पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है। इसके प्रभावी संचालन के लिए जिले में लगभग 150 प्रशिक्षित ट्रॉमा सपोर्ट स्वयंसेवकों की तैनाती भी की गई है।

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