टॉप माओवादी नेता देवजी के आत्मसमर्पण की इतनी चर्चा क्यों?
तेलंगाना के मुलुगु जिले में प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के महासचिव और पोलित ब्यूरो सदस्य थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने तीन अन्य वरिष्ठ साथियों के साथ पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। यह घटना संगठन के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि देवजी बसवराजू की मौत के बाद पार्टी की कमान संभाल रहे थे।
तेलंगाना पुलिस महानिदेशक ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की। देवजी ने कुछ दिन पहले ही सरेंडर किया था, लेकिन अब इसे सार्वजनिक रूप से घोषित किया गया है। उनके साथ केंद्रीय समिति सदस्य मुरली उर्फ संग्राम (मल्ला राजी रेड्डी), तेलंगाना राज्य समिति सचिव दामोदर और डीकेएसजेडसी सदस्य नरसिम्हा रेड्डी ने भी आत्मसमर्पण किया। ये सभी नेता कई दशकों से भूमिगत थे।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा कि इससे हिंसा का दायरा तेजी से सिमट रहा है और शांति प्रक्रिया मजबूत हो रही है। उन्होंने बाकी माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
देवजी पर छत्तीसगढ़ सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था, जबकि तेलंगाना पुलिस ने 25 लाख रुपये का इनाम रखा था। संग्राम पर एक करोड़ रुपये का इनाम था। कुल मिलाकर इन पर लाखों-करोड़ों के इनाम थे, जो अब समाप्त हो गए हैं।
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा, “बसवराजू के बाद देवजी ने ही हथियारबंद नक्सल आंदोलन की कमान संभाली थी। उनका सरेंडर नक्सलवाद के अंत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।” उन्होंने दोहराया कि 31 मार्च 2026 तक देश से हथियारबंद नक्सलवाद की समस्या समाप्त हो जाएगी, जैसा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है।
पिछले साल मई में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में मुठभेड़ में बसवराजू (नंबाल्ला केशव राव) की मौत के बाद देवजी को संगठन का सर्वोच्च नेता माना जा रहा था। माओवादी पार्टी के अनुसार, वह वर्तमान में केंद्रीय समिति के महासचिव थे।
देवजी का जन्म तेलंगाना के जगतियाल जिले (पूर्व करीमनगर) में एक दलित परिवार में हुआ था। 1980 के दशक में एसआरआर कॉलेज, करीमनगर में बीएससी की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में सक्रिय हुए। छात्र संगठनों के संघर्ष के बाद वे भूमिगत हो गए। उन्होंने करीमनगर क्षेत्र में रेडिकल विद्यार्थी संगठन चलाया और 1983-84 में दंडकारण्य भेजे गए।
दंडकारण्य के जंगलों में उन्होंने पार्टी आयोजक के रूप में काम किया, गढ़चिरौली में 15 साल बिताए, डिविजनल कमेटी सदस्य बने, फिर 1993-94 में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य चुने गए। 1990 के मध्य में सैन्य विंग में शामिल हुए। 1996 में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की पहली प्लाटून के पहले कमांडर बने। 2001 में केंद्रीय समिति के सबसे युवा सदस्यों में शामिल हुए और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के सदस्य बने।
विभिन्न नामों जैसे संजीव, चेतन, सुदर्शन, रमेश से काम किया। बसवराजू के साथ मिलकर कई बड़े हमलों में भूमिका निभाई। एनआईए की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थे।
परिवार ने क्या कहा?
देवजी के भाई थिप्परी गंगाधर ने कहा था कि अगर वह पुलिस हिरासत में हैं तो उन्हें सुरक्षित अदालत में पेश किया जाए। उनकी भतीजी थिप्परी सुमा ने खुला पत्र लिखकर आत्मसमर्पण की अपील की थी, जिसमें गर्व और चिंता का जिक्र था।
यह सरेंडर नक्सलवाद विरोधी अभियान में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, खासकर 31 मार्च 2026 की समयसीमा से ठीक पहले।
