नक्सलियों के गढ़ में हड़कंप: पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी और तीन अन्य बड़े नेता मुख्यधारा में लौटे

नक्सलियों संगठन को अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक झटका लगा है। संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य टिप्पिरी थिरुपथी उर्फ देवजी ने तीन अन्य वरिष्ठ साथियों के साथ हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। सभी नेताओं ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पहली बार शीर्ष नेतृत्व ने एक साथ छोड़ा संगठन

सूत्रों के मुताबिक, यह पहली बार है जब केंद्रीय स्तर के दो बड़े माओवादी नेताओं ने एक साथ सरेंडर किया है। देवजी के साथ आत्मसमर्पण करने वालों में केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम, स्टेट कमेटी मेंबर बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर और स्टेट कमेटी सदस्य नुने नरसिम्हा रेड्डी उर्फ सन्नू दादा शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस कदम से संगठन के शीर्ष रणनीतिक ढांचे को गहरा झटका लगा है।

तेलंगाना डीजीपी के समक्ष डाले हथियार

चारों शीर्ष नेताओं ने तेलंगाना के डीजीपी Shivdhar Reddy के समक्ष आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों के अनुसार, इन नेताओं का मुख्यधारा में लौटना शांति प्रक्रिया और पुनर्वास नीति की प्रभावशीलता को भी दर्शाता है। इससे सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी कैडरों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ना तय माना जा रहा है।

सुरक्षा बलों के दबाव से कमजोर पड़ा नेटवर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन सर्च ऑपरेशन और लगातार बढ़ते दबाव ने माओवादी नेटवर्क को कमजोर किया है। संगठन के भीतर समन्वय की कमी, घटती लॉजिस्टिक सपोर्ट और नेतृत्व स्तर पर असुरक्षा की भावना के चलते वरिष्ठ नेताओं को हथियार डालने पर मजबूर होना पड़ा।

बस्तर और सीमावर्ती क्षेत्रों में पड़ेगा असर

इस आत्मसमर्पण का असर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र और तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर सक्रिय माओवादी गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। जानकारों का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के हटने से संगठनात्मक संचालन और रणनीतिक फैसलों पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे नक्सल विरोधी अभियानों को और मजबूती मिलेगी।

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