छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक उठापटक! जहां पद नहीं, वहां कर दिया तबादला….
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी एक आदेश ने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी इस आदेश में अशोक कुमार कश्यप को समग्र शिक्षा मुंगेली के जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) के पद से प्रतिनियुक्ति समाप्त कर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टेमरी, जिला मुंगेली में अस्थायी रूप से भेजा गया है।
6 महीने पहले बने डीएमसी, अब अचानक वापसी
जानकारी के अनुसार, अशोक कुमार कश्यप वर्ष 2017 से एपीसी (असिस्टेंट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर) के रूप में कार्यरत थे और महज छह महीने पहले ही उन्हें मुंगेली जिले का डीएमसी बनाया गया था। उनकी सेवानिवृत्ति जून 2026 में होनी है। ऐसे में उनकी अचानक प्रतिनियुक्ति समाप्त कर विद्यालय भेजना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या किसी अदृश्य दबाव का परिणाम?
आदेश में ही गड़बड़ी, मूल पद गलत लिखा गया
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आदेश में उनका “मूल पद” प्राचार्य (ई-संवर्ग) उल्लेखित किया गया है, जबकि वास्तविक मूल पद अंग्रेजी व्याख्याता है। मंत्रालय स्तर से जारी आदेश में इस प्रकार की त्रुटि यह संकेत देती है कि फाइलों की जल्दबाजी में तथ्य और मूल सेवा अभिलेखों की पुष्टि नजरअंदाज की गई।
जहां भेजा गया, वहां पद ही रिक्त नहीं
सूत्रों के अनुसार, जिस शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टेमरी में उन्हें भेजा गया है, वहां अंग्रेजी व्याख्याता का पद रिक्त नहीं है। ऐसे में यह पदस्थापना व्यवहारिक रूप से लागू कैसे होगी, यह स्पष्ट नहीं। क्या यह केवल “एडजस्टमेंट” है या किसी को हटाने की प्रशासनिक कवायद?

जूनियर को मिला दायित्व, वरिष्ठ की अनदेखी
मुंगेली में डीएमसी के रूप में अब अशोक सोनी को दायित्व सौंपा गया है, जो सेवा में अशोक कश्यप से जूनियर हैं। वरिष्ठता की इस अनदेखी ने विभागीय निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
