WTO at 30: एचएनएलयू संगोष्ठी में एमएफएन सिद्धांत पर चिंता, वैश्विक व्यापार करियर पर मंथन
WTO at 30: विश्व व्यापार संगठन (WTO) के वैश्विक व्यापार शासन के 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HNLU), रायपुर में एक उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। “वैश्विक व्यापार करियर, WTO की 30-वर्षीय विरासत और भविष्य की राहें” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में व्यापार और नीति जगत के कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए। यह आयोजन एक शिखर सम्मेलन पूर्व कार्यक्रम के रूप में रखा गया, जिसमें वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी, प्रतिष्ठित लॉ फर्मों के प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय नीति विश्लेषकों ने भाग लिया।
एमएफएन सिद्धांत के क्षरण पर चेतावनी
उद्घाटन सत्र में भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (IIFT) के सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL) के प्रमुख प्रो. जेम्स नेदुम्परा ने मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने WTO के मूल आधार ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ (MFN) सिद्धांत के कमजोर पड़ने पर गंभीर चिंता जताई।
एमएफएन सिद्धांत के तहत सदस्य देशों को सभी व्यापारिक भागीदारों के साथ समान व्यवहार करना होता है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में बहुपक्षीय नियमों की अनदेखी बढ़ती दिख रही है। प्रो. नेदुम्परा ने कहा कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
डब्ल्यूटीओ विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका
HNLU के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने WTO के 30 वर्षों के विकास क्रम की चर्चा करते हुए संगठन के उद्देश्यों और वास्तविक उपलब्धियों के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत अब WTO विमर्श में हाशिए की भूमिका से निकलकर एक केंद्रीय और प्रभावशाली भागीदार के रूप में उभरा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलते वैश्विक व्यापार ढांचे में भारत की रणनीतिक भूमिका और मजबूत हुई है।
युवा पेशेवरों के लिए अवसरों की रूपरेखा
संगोष्ठी केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह युवा छात्रों और पेशेवरों के लिए करियर मार्गदर्शन का मंच भी बनी। WTO की ‘यंग ट्रेड लीडर’ और ग्लोबल काउंसिल की विश्लेषक आरुषि श्रीवास्तव ने ‘यंग ट्रेड लीडर्स प्रोग्राम’ के बारे में जानकारी दी और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से शुरुआती जुड़ाव के महत्व को बताया।
वहीं DGS एसोसिएट्स की अमिता वर्मा दुग्गल और अदिति वारियर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून में उभरते अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद WTO की संस्थागत प्रासंगिकता बनी हुई है और इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
रायपुर बना अंतरराष्ट्रीय व्यापार विमर्श का केंद्र
HNLU के सेंटर फॉर WTO एंड WIPO स्टडीज द्वारा CTIL और WTO चेयर्स प्रोग्राम के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का समापन ‘कौटिल्य सोसाइटी HNLU लेख लेखन प्रतियोगिता’ के परिणामों की घोषणा के साथ हुआ।
यह संगोष्ठी रायपुर को अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून और नीति विमर्श के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
