Mamata Banerjee Supreme Court: SIR विवाद पर खुद अदालत पहुंचीं ममता बनर्जी, 70 लाख वोटों का मुद्दा उठाया

Mamata Banerjee Supreme Court: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली में ऐसा कदम उठाया है, जिसने राजनीतिक और संवैधानिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। ममता बनर्जी न सिर्फ चुनाव आयोग के खिलाफ खुलकर सामने आईं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर खुद दलीलें भी पेश कीं। अपने रुख को साफ करते हुए उन्होंने कहा कि वह जानती हैं कि बंगाल में उन्हें एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़नी पड़ेगी और वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।

दिल्ली पहुंचते ही ममता बनर्जी उन लोगों को साथ लेकर आईं, जिन्हें वह एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया का पीड़ित बता रही हैं। उन्होंने पहले चुनाव आयोग से मुलाकात की और यह मांग रखी कि आयोग के साथ होने वाली बैठक को कैमरे के सामने कराया जाए। हालांकि, यह मांग स्वीकार नहीं हुई। इसके अगले ही दिन ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय मीडिया के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें कथित पीड़ितों को भी मंच पर बैठाया गया।

कोर्ट में जाने से पहले सियासी संदेश

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग तक की बात कह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राज्य की मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को छह पत्र लिखे, लेकिन चुनाव आयोग ने एक का भी जवाब नहीं दिया। ममता ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के साथ हुई बैठक में उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया गया।

इसी प्रेस वार्ता में ममता बनर्जी ने संकेत दे दिया था कि वह अगले दिन सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान खुद मौजूद रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास कानून की डिग्री है और वह इस मामले में याचिकाकर्ता भी हैं, इसलिए अपनी बात खुद रखना चाहती हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ

सुनवाई वाले दिन ममता बनर्जी सुबह 10:30 बजे ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गईं और पीछे की कतार में बैठीं। जब दोपहर 12:50 बजे पश्चिम बंगाल से जुड़े एसआईआर मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो वह आगे आईं। उनके वकील जब अदालत में दलीलें दे रहे थे, तभी ममता बनर्जी ने खुद चीफ जस्टिस से बोलने की अनुमति मांगी।

उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें केवल पांच मिनट चाहिए, लेकिन चीफ जस्टिस ने उन्हें 15 मिनट तक बोलने की अनुमति दी। इस दौरान ममता बनर्जी ने वही तर्क रखे, जो वह अब तक सार्वजनिक सभाओं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखती आई हैं।

70 लाख वोटों को लेकर विवाद

ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट से उन करीब 70 लाख मतदाता नामों को हटाए जाने पर राहत चाहती हैं, जो उनके अनुसार नामों की मामूली वर्तनी संबंधी गड़बड़ियों के कारण काट दिए गए। उन्होंने दावा किया कि बनर्जी–बंदोपाध्याय, चटर्जी–चट्टोपाध्याय, गांगुली–गंगोपाध्याय और रॉय–राय जैसे नामों के अंतर की वजह से बंगाल में 1 करोड़ 36 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

इसके पीछे का सियासी संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ममता बनर्जी के लिए यह कदम केवल कानूनी नहीं, बल्कि सियासी तौर पर भी अहम है। सुप्रीम कोर्ट जाकर खुद दलीलें पेश कर उन्होंने अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह उनके अधिकारों की लड़ाई खुद देश की सर्वोच्च अदालत तक लड़ने को तैयार हैं।

माना जा रहा है कि इससे खासकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच ममता बनर्जी के प्रति भरोसा और मजबूत हो सकता है। इससे पहले भी एनआरसी के मुद्दे पर ममता बनर्जी ने मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट रखा था और अब एसआईआर के मुद्दे को लेकर वही रणनीति दोहराई जा रही है।

सुनवाई के बाद ममता बनर्जी कोलकाता लौट चुकी हैं, लेकिन जाते-जाते यह संकेत भी दे गई हैं कि 9 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई के लिए वह एक बार फिर दिल्ली आ सकती हैं।

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