7 करोड़ का धान चोरी नहीं, चूहे खा गए! : कवर्धा धान घोटाले मामले में कुकदूर खरीदी केंद्र के प्रबंधक पर FIR दर्ज…
कवर्धा धान घोटाले में एक्शन
कवर्धा: जिले में धान खरीदी और संग्रहण व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। सरकारी सिस्टम की लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को चौंका दिया है। जिले के विभिन्न धान संग्रहण केंद्रों से हजारों क्विंटल धान गायब होने का खुलासा हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मामला तब और ज्यादा सुर्खियों में आया, जब एक जिम्मेदार अधिकारी ने धान के गायब होने पर “चूहे, दीमक और कीड़े” को कारण बता दिया।
कुकदूर धान खरीदी केंद्र पर बड़ी कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में प्रशासन अब सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई में जुट गया है। इसी कड़ी में कुकदूर धान खरीदी केंद्र के समिति प्रबंधक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। आरोप है कि प्रबंधक ने करीब 15 लाख रुपये मूल्य के धान का गबन किया है। मामले को गंभीर मानते हुए कुकदूर थाना में संबंधित प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब दस्तावेजों की जांच और गबन की पूरी कड़ी खंगालने में जुटी हुई है।
एसपी का सख्त संदेश: गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं
जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जहां भी धान की कमी, हेराफेरी या गबन की शिकायत मिल रही है, वहां बिना किसी दबाव के तत्काल जांच और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कोदवागोड़ान धान खरीदी केंद्र के प्रभारी पर इसी तरह की अनियमितताओं के चलते एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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‘चूहा बयान’ से मचा बवाल
कवर्धा जिले में सामने आए इस घोटाले ने पूरी धान संग्रहण व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लगभग 26 हजार क्विंटल धान का हिसाब नहीं मिल पा रहा है, जो सीधे तौर पर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाता है। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने इस गंभीर चूक की जिम्मेदारी लेने के बजाय अजीबो-गरीब तर्क दिए। अधिकारियों का कहना है कि धान न तो चोरी हुआ और न ही बेचा गया, बल्कि चूहे, दीमक और कीड़ों ने उसे नष्ट कर दिया।
इस बयान के बाद लोगों में आक्रोश और बढ़ गया, क्योंकि अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि प्रदेश के अन्य जिलों में स्थिति इससे भी खराब है। यानी अपनी नाकामी को छिपाने के लिए पूरे प्रदेश की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। जब मीडिया ने जवाबदेह अधिकारियों से सवाल किया तो उनका रवैया और बयान लोगों को असहज करने वाला नजर आया।
लगातार कस रहा शिकंजा
हालांकि, बढ़ते दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशासन हरकत में नजर आ रहा है। लगातार हो रही जांच और एफआईआर से यह साफ है कि धान घोटाले में शामिल लोगों पर शिकंजा कसता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
यह पूरा मामला न सिर्फ धान खरीदी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अगर समय रहते सख्ती न बरती जाए, तो किसानों की मेहनत और सरकारी संसाधन किस तरह बर्बाद हो सकते हैं। जनता अब इस बात की उम्मीद कर रही है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए।
