Raipur City Development: 2040 तक बदलेगा रायपुर का चेहरा, 12,692 करोड़ का विकास ब्लू प्रिंट तैयार

Raipur City Development: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा के अनुरूप राजधानी रायपुर को एक आधुनिक और जनकेंद्रित शहर के रूप में विकसित करने के लिए 2040 तक का विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया गया है। इस मास्टर प्लान में अगले 15 वर्षों में बढ़ने वाली जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए जल प्रबंधन, स्वच्छता, सीवरेज, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर खास जोर दिया गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस विकास योजना का प्रस्तुतिकरण किया गया।

शहर में बारिश के दौरान जलभराव और नालियों के ओवरफ्लो की समस्या से स्थायी निजात दिलाने के लिए करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड सीवरेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके तहत नए सीवरेज चैनल तैयार होंगे और पूरा ड्राइंग-डिजाइन डिजिटल रूप में संरक्षित रहेगा, ताकि भविष्य में प्रशासनिक बदलाव के बावजूद व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

पेयजल की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए डूंडा क्षेत्र में 130 करोड़ रुपये की लागत से 100 से 150 एमएलडी क्षमता का आधुनिक फिल्टर प्लांट स्थापित किया जाएगा। वहीं पंडरी बस स्टैंड परिसर में 250 करोड़ रुपये की लागत से व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के निर्माण का प्रस्ताव है। लोक निर्माण विभाग द्वारा टेमरी एक्सप्रेस वे को वीआईपी रोड से जोड़ने के लिए 156 करोड़ रुपये की फोरलेन सड़क बनाई जाएगी, जबकि 186 करोड़ रुपये की लागत से संग-उरकुरा रोड के निर्माण की भी योजना है।

शहर की बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 450 करोड़ रुपये की लागत से अंडरग्राउंड केबलिंग की जाएगी। इसके साथ ही रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 131 करोड़ रुपये की लागत से खारुन रिवर फ्रंट विकसित किया जाएगा। जल संसाधन विभाग, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, बिजली कंपनी, हाउसिंग बोर्ड और अन्य विभाग मिलकर 2040 तक की इन योजनाओं पर कुल 12,692 करोड़ रुपये खर्च करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रायपुर को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल, बिजली और संचार सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी के विकास के लिए फंड की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और नगरीय निकायों को पहले की तुलना में ढाई गुना अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

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