पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में की पूजा, कहा- “गजनी-औरंगजेब इतिहास में दफन, सोमनाथ की ध्वजा आज भी लहरा रही”

सोमनाथ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) के आयोजन में शामिल होने के लिए तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी ने शौर्य यात्रा में शिरकत की और उसके बाद सोमनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद सद्भावना ग्राउंड में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व, विदेशी आक्रांताओं के हमलों और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा पुनर्निर्माण की नींव रखने के योगदान को याद किया।

शौर्य यात्रा में शामिल हुए पीएम

रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यह शोभा यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई थी। यात्रा में शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक देखने को मिला।

मंदिर में करीब 30 मिनट की पूजा-अर्चना

सोमनाथ मंदिर पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। पूजा के बाद पीएम ने पुजारियों और स्थानीय कलाकारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने ढोल (चेंदा वाद्य यंत्र) भी बजाया, जिससे माहौल में भक्ति और उत्साह का संचार हुआ।

पीएम का संबोधन: गजनी-औरंगजेब इतिहास में दफन

सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “1000 साल पहले हमलावरों को लगा था कि वे जीत गए हैं। गजनी से लेकर औरंगजेब तक इतिहास में दफन हो गए, लेकिन सोमनाथ पर भगवा ध्वज आज भी शान से लहरा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। जब (1951 में) सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई।”

पीएम मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को लेकर कहा, “इस आयोजन में गर्व है, गरिमा है, गौरव है। इसमें वैभव की विरासत है, अध्यात्म की अनुभूति है, आनंद है, आत्मीयता है और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है। 72 घंटों तक अनवरत ओंकार नाद, 72 घंटों का अनवरत मंत्रोच्चार, 1000 ड्रोन द्वारा वैदिक गुरुकुलों के 1000 विद्यार्थियों की उपस्थिति, सोमनाथ के 1000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन और आज 108 अश्वों के साथ शौर्य यात्रा – सब कुछ मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।”

सोमनाथ की शक्ति अमर

प्रधानमंत्री ने कहा, “जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे, तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है। लेकिन वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते थे, उसके नाम में ही सोम अर्थात् अमृत जुड़ा हुआ है। उसमें हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार जुड़ा है। उसके भीतर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है, जो कल्याणकारक भी है और प्रचंड तांडव: शिव: यह शक्ति का स्रोत भी है। गजनी से औरंगजेब तक सोमनाथ पर हमला करने वाले तमाम आक्रांता इतिहास के चंद पन्नों में दफन होकर रह गए, लेकिन चिर-चिरातन सोमनाथ मंदिर सागर के तट पर उसी तरह तनकर खड़ा है।”

तुष्टिकरण के ठेकेदारों पर निशाना

पीएम मोदी ने कहा, “भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं। ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद, गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए। तुष्टिकरण के ठेकेदारों ने इस कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेके।”

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में गर्व, गरिमा, गौरव और वैभव की विरासत है। उन्होंने कहा, “यह आयोजन हमें सावधान रहने की याद दिलाता है। हमें एकजुट रहना है और ऐसी ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटने की कोशिशों में लगी हुई हैं।”

यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण रहा। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल की भूमिका को याद करते हुए पीएम ने देशवासियों को एकता और सतर्कता का संदेश दिया।

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