गिग वर्कर्स के लिए खुशखबरी! सरकार लाई सोशल सिक्योरिटी का नया प्लान…
गिग वर्कर्स के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नए ड्राफ्ट नियम (Code on Social Security (Central) Rules, 2025) जारी किए हैं। इन नियमों के लागू होने से देश के करीब 1.27 करोड़ गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा, जिसमें स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा, दुर्घटना कवर, पेंशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो पारंपरिक नौकरी के बजाय ऐप-आधारित प्लेटफॉर्म्स (जैसे जोमैटो, स्विगी, उबर, ओला, ब्लिंकिट आदि) के जरिए डिलीवरी, राइड-शेयरिंग या अन्य सेवाएं देते हैं। इनकी आय फिक्स नहीं होती, बल्कि हर काम के आधार पर मिलती है। वर्तमान में देश में ऐसे वर्कर्स की संख्या लगभग 1.27 करोड़ है, जो 2030 तक बढ़कर 2.35 करोड़ तक पहुंच सकती है।
हाल ही में क्रिसमस और न्यू ईयर के दौरान गिग वर्कर्स की हड़ताल के बाद सरकार ने ये ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा गया है, जिसके बाद इन्हें फाइनल कर लागू किया जाएगा।
मुख्य प्रावधान और शर्तें
पात्रता के लिए न्यूनतम काम: पिछले वित्त वर्ष में किसी एक एग्रीगेटर (प्लेटफॉर्म) के साथ कम से कम 90 दिन काम करना जरूरी होगा। यदि कई एग्रीगेटर्स के साथ काम किया हो, तो कुल 120 दिन होने चाहिए।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया: गिग वर्कर्स को केंद्र सरकार के निर्धारित पोर्टल (संभवतः e-Shram पोर्टल या समर्पित पोर्टल) पर रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर अनिवार्य है और उम्र 16 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर: रजिस्ट्रेशन के बाद एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर जनरेट होगा।
डिजिटल आईडी कार्ड: पात्र वर्कर्स को फोटो और अन्य डिटेल्स वाली डिजिटल या फिजिकल आईडी कार्ड मिलेगा, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा।
डिटेल्स अपडेट: मोबाइल नंबर, पता, स्किल आदि में बदलाव होने पर पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य होगा, वरना लाभ प्रभावित हो सकता है।
सोशल सिक्योरिटी फंड: एग्रीगेटर्स (प्लेटफॉर्म कंपनियां) अपने टर्नओवर का कुछ प्रतिशत योगदान देंगे, जो अलग फंड में जमा होगा।
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड: बोर्ड में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के 5 सदस्य रोटेशन आधार पर नामित किए जाएंगे, जो वर्कर्स की संख्या का अनुमान लगाएंगे और नई स्कीम्स सुझाएंगे।
वर्तमान में ज्यादातर गिग वर्कर्स को कंपनियां इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर मानती हैं, इसलिए उन्हें ईंधन, वाहन मेंटेनेंस, मोबाइल-इंटरनेट जैसे खर्चे खुद उठाने पड़ते हैं। उनकी औसत मासिक आय 10,000-15,000 रुपये के बीच बताई जाती है।
ये ड्राफ्ट नियम गिग इकॉनमी को मजबूत बनाने और वर्कर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम हैं। फीडबैक के बाद फाइनल नियम लागू होने पर लाखों डिलीवरी बॉयज, कैब ड्राइवर्स और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को लंबे समय से मांगी जा रही सुविधाएं मिल सकेंगी।
