Jammu and Kashmir : J&K में ‘ऑपरेशन क्लीन आउट’, 100 से ज्यादा सरकारी कर्मचारी बर्खास्त, 140 से अधिक पर नजर…

Jammu and Kashmir : जम्मू और कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त करने की दिशा में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा अभियान तेज कर दिया है। एक ओर सेना द्वारा ऑपरेशन क्लीन आउट चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आतंकियों के समर्थकों और नेटवर्क से जुड़े लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में पिछले तीन वर्षों के दौरान देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर 100 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है, जबकि 140 से ज्यादा संदिग्ध कर्मचारियों को कड़ी निगरानी में रखा गया है।

Jammu and Kashmir : उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इन 140 संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई वर्ष 2026 में और तेज की जाएगी। हालांकि, बड़े पैमाने पर एक साथ बर्खास्तगी करने के बजाय प्रशासन चरणबद्ध और सबूत-आधारित रणनीति अपना रहा है, ताकि नेटवर्क को पहले से सतर्क होने का मौका न मिले और मजबूत मामलों में ही कार्रवाई हो सके।

नार्को-टेररिज्म से जुड़े लोग भी निशाने पर

सूत्रों ने बताया कि निगरानी में रखे गए सभी लोग लगातार सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं। कार्रवाई बैचों में की जाएगी और किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई या सबूत मिटाने की कोशिश को रोकने के लिए पुख्ता जानकारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही नार्को-टेररिज्म में शामिल लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है। ड्रग्स तस्करी और आतंकवादी फंडिंग के गठजोड़ को उजागर करने के लिए एक समानांतर सूची तैयार की जा रही है।

2021 से चल रहा है सख्त अभियान

यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2021 में शुरू हुई थी, जब संदिग्ध आतंकी संबंधों वाले सरकारी कर्मचारियों की जांच के लिए एक विशेष पैनल का गठन किया गया। अप्रैल 2024 में गठित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के बाद इस अभियान को और गति मिली। STF का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर के इंटेलिजेंस प्रमुख कर रहे हैं, जो RAW के अनुभवी अधिकारी हैं और आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।

STF, टेरर मॉनिटरिंग ग्रुप (TMG) के साथ मिलकर काम करती है। यह समूह कच्ची खुफिया सूचनाओं की जांच कर प्रमाणित मामलों को जुलाई 2020 में गठित हाई-लेवल कमेटी को भेजता है। इस बहु-एजेंसी प्रणाली के जरिए कई बड़े आतंकी और समर्थन नेटवर्क का खुलासा किया गया है।

प्रमुख मामलों में हुई बर्खास्तगी

शुरुआती कार्रवाई के तहत जुलाई 2021 में 11 कर्मचारियों को सेवा से हटाया गया था। इनमें हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के बेटे सैयद अहमद शकील और शाहिद यूसुफ शामिल थे, जिन पर आतंकी फंडिंग के गंभीर आरोप थे। इसके अलावा, नायब तहसीलदार नजीर अहमद वानी को भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता के कारण और DSP दविंदर सिंह को आतंकी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में बर्खास्त किया गया था।

Youthwings