अयोध्या के महंत राजू दास का बड़ा बयान, कहा – भूपेश बघेल रावण का दूसरा रूप, संतों का कर रहे अपमान

दुर्ग। भिलाई के जयंती स्टेडियम में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर) की पंच दिवसीय हनुमंत कथा का समापन हो गया। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में आयोजित इस कथा ने धार्मिक उत्साह के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की राजनीति में तीखी बयानबाजी और विवाद भी जन्म दिए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और शास्त्री के बीच ‘अंधविश्वास’ को लेकर शुरू हुई नोकझोंक अब और तेज हो गई है, जिसमें अयोध्या की हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने भी कूदकर पूर्व सीएम पर गंभीर आरोप लगाए।

 

भूपेश बघेल vs धीरेंद्र शास्त्री

कथा से पहले भूपेश बघेल ने शास्त्री और पंडित प्रदीप मिश्रा पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि ये कथावाचक भगवान के बारे में नहीं, बल्कि टोटके और अंधविश्वास बताते हैं। बघेल ने दावा किया कि हिंदू कभी खतरे में नहीं थे, और ऐसे कार्यक्रमों की आड़ में पैसा बटोरा जा रहा है। उन्होंने शास्त्री को ‘बीजेपी एजेंट’ तक कहा और छत्तीसगढ़ के संतों से शास्त्रार्थ की चुनौती दी।

 

जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को जोड़ना, हनुमान भक्ति और राष्ट्र जागरण को अंधविश्वास मानने वालों को देश छोड़ देना चाहिए। शास्त्री ने छत्तीसगढ़ में आगे पदयात्रा और चर्च के सामने हनुमंत कथा करने का ऐलान भी किया। इस बयानबाजी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

 

महंत राजू दास ने भूपेश बघेल को ‘रावण का दूसरा रूप’ बताया

कथा समापन के बाद विवाद और भड़क गया जब अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने भूपेश बघेल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “भूपेश बघेल के परिवार में पांच संत हुए हैं, लेकिन रावण किसका बेटा था? संत का ही बेटा था, प्रकांड विद्वान था, ब्राह्मण था, भोलेनाथ को मानता था, लेकिन सनातन संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया। इसलिए मैं कहता हूं कि भूपेश बघेल रावण का दूसरा रूप हैं।”

 

महंत राजू दास ने आगे आरोप लगाया कि बघेल कहीं न कहीं ईसाई मिशनरियों से प्रेरित हैं, क्योंकि उनका ‘धर्मांतरण का धंधा’ बंद होने वाला है। उन्होंने कहा कि मिशनरियों की दुकान पहले अच्छी चलती थी, लेकिन अब बाबा बागेश्वर और प्रदीप मिश्रा जैसे संतों के कारण सनातन भावना जाग रही है, इसलिए उन्हें ये संत बीजेपी के एजेंट लगते हैं।

 

महंत ने महात्मा गांधी का हवाला देते हुए पूछा कि गांधी ने रामराज की परिकल्पना की थी, क्या कांग्रेस अब उनके विचारों को नहीं मानती? उन्होंने कहा कि संत किसी पार्टी के नहीं होते, बल्कि लोगों के कल्याण के लिए काम करते हैं। भूपेश बघेल संतों का अपमान कर रहे हैं, जो लाखों लोगों की आस्था का अपमान है। ऐसे विचारों से ही कांग्रेस समाप्त हो रही है। उन्होंने बघेल की कार्यशैली को सनातन विरोधी बताते हुए कहा कि वे चाहते हैं छत्तीसगढ़ में केवल ईसाई मिशनरी काम करें और सनातन जागरण वाले संत न रहें।

 

कथा के दौरान अन्य घटनाएं

कथा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही, लेकिन भीड़ में कुछ संदिग्ध पकड़े गए। एक महिला श्रद्धालु ने मिलने न मिलने पर नस काट ली, जिससे हड़कंप मचा। पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया।

 

यह विवाद अब छत्तीसगढ़ की राजनीति और धार्मिक भावनाओं को जोड़कर बड़ा मुद्दा बन चुका है, जहां सनातन, अंधविश्वास और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

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