Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति में 4 चेहरे बढ़ा रहे NDA और INDIA की टेंशन

Bihar Chunav 2025

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पटना | Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में अब महज पांच महीने बचे हैं, और राज्य की राजनीति में गहमा-गहमी तेज हो गई है। मुख्य मुकाबला NDA और INDIA ब्लॉक के बीच है, लेकिन चार प्रमुख चेहरे इन दोनों गठबंधनों के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं: चिराग पासवान, मुकेश सहनी, प्रशांत किशोर (पीके) और आई.पी. गुप्ता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 मई को दो दिवसीय दौरे पर बिहार आ रहे हैं, जबकि राहुल गांधी के आने की चर्चा अभी आधिकारिक नहीं है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज दिल्ली के लिए निकल रहे हैं।

सहयोगी दल और सीटों की खींचतान

NDA (भाजपा, जदयू, लोजपा-रामविलास, हम, आरएलएम) और INDIA ब्लॉक (राजद, कांग्रेस, 3 वामपंथी दल, वीआईपी, आरएलजेपी) दोनों ही सीटों के बंटवारे को लेकर चौकस हैं। हालांकि, मुख्य पार्टियों से ज्यादा सहयोगी दल सीटों के लिए बेचैन दिख रहे हैं।

लोजपा-रामविलास के नेता चिराग पासवान ने कभी 60 सीटों की मांग की तो कभी बिहार की सेवा के लिए विधानसभा चुनाव लड़ने की बात कही। उनकी पार्टी उन्हें बिहार की राजनीति में लौटने का प्रस्ताव भी पारित कर चुकी है। वहीं, हम के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी 40 सीटों की मांग करते रहे हैं।

महागठबंधन में, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी अपनी पार्टी के लिए लगातार 60 सीटें और खुद के लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग दोहरा रहे हैं। उनकी मजबूत स्थिति ने उन्हें NDA और INDIA ब्लॉक दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है।

चुनावी मैदान में नए खिलाड़ी

पिछले एक साल में बनी दो नई राजनीतिक पार्टियों के नेता भी अपनी जगह बनाने में लगे हैं। इनमें जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) और पान समाज के नेता आई.पी. गुप्ता शामिल हैं। प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को अपनी पार्टी लॉन्च की थी और अब उनके साथ जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मोदी सरकार-2 में केंद्रीय मंत्री रहे आरसीपी सिंह भी जुड़ गए हैं। जन सुराज की सभाओं में अच्छी भीड़ उमड़ रही है।

आई.पी. गुप्ता ने इसी साल 7 अप्रैल को अपनी भारतीय इंकलाब पार्टी (बीआईपी) की घोषणा की थी। उन्होंने गांधी मैदान में एक बड़ी सभा करके अपनी ताकत का प्रदर्शन किया, जिससे सभी राजनीतिक दल चौंक गए। आई.पी. गुप्ता पान समाज के लिए एसटी आरक्षण की मांग कर रहे हैं और मुकेश सहनी की तरह ही सभी गठबंधनों के चहेते बने हुए हैं।

इन चार नेताओं की चर्चा क्यों?

बिहार की राजनीति में इन चारों नेताओं की चर्चा के अलग-अलग कारण हैं:

  • प्रशांत किशोर (पीके): जन सुराज पार्टी भले ही नई हो, लेकिन दिसंबर 2024 में हुए विधानसभा उपचुनावों में इसने 10 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। तिरहुत क्षेत्र के एमएलसी उपचुनाव में भी जन सुराज पार्टी का उम्मीदवार NDA और महागठबंधन को पछाड़ते हुए दूसरे नंबर पर रहा, जिससे एक निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई। यह पार्टी के गठन के छह महीने के भीतर ही उसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

  • आई.पी. गुप्ता: अति पिछड़ा समाज से आने वाले गुप्ता, जो पहले कांग्रेस में थे, ने पान समाज के लोगों को अनुसूचित जाति के दर्जे से वंचित किए जाने के विरोध में नई पार्टी बनाई। उनकी सभाओं में उमड़ी भीड़ ने सभी सियासी दलों को चौंका दिया था, और इसमें कोई शक नहीं कि वे चुनाव परिणामों को प्रभावित करेंगे।

  • चिराग पासवान: चिराग पासवान 2020 से ही बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे हैं। उस विधानसभा चुनाव में NDA से अलग होकर उन्होंने 134 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। भले ही उनकी पार्टी ने सिर्फ एक सीट जीती, लेकिन हाल ही के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। उनके नेतृत्व में 5 सांसद चुने गए, और उनकी पार्टी को 5 प्रतिशत से अधिक वोट मिले, जिससे लोजपा-आर का सक्सेस रेट 100 प्रतिशत रहा। चिराग को अपनी इसी ताकत का गुमान है।

  • असदुद्दीन ओवैसी: एआईएमआईएम, असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में, ने 2020 में 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और सीमांचल में उनके 5 उम्मीदवार जीते थे (हालांकि बाद में 4 विधायक राजद में चले गए)। 2015 में 0.5 प्रतिशत से शुरू होकर 2020 में उनकी पार्टी का वोट 1.25 प्रतिशत तक पहुंच गया। बाद के उपचुनावों में भी एआईएमआईएम की ताकत दिखी है। इस बार भी ओवैसी जोरदार तरीके से मैदान में उतरने वाले हैं, इसलिए उन्हें नजरअंदाज करना एक बड़ी भूल होगी।

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