1 करोड़ के इनामी CCM रामधेर मज्जी समेत 11 नक्सलियों ने हथियार डाले

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में एंटी-नक्सल अभियान को एक और जोरदार झटका लगा है। सुरक्षाबलों की लगातार कार्रवाइयों, बढ़ते दबाव और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर खैरागढ़ जिले में सक्रिय सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) रामधेर मज्जी समेत 11 नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 6 महिला नक्सली भी शामिल हैं। यह सामूहिक आत्मसमर्पण नक्सली संगठन की कमर तोड़ने वाली घटना मानी जा रही है, खासकर MMC जोन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

 

सूत्रों के अनुसार, यह आत्मसमर्पण खैरागढ़ जिले के बकरकट्टा थाना क्षेत्र में 7-8 दिसंबर 2025 की दरमियानी रात करीब 2 से 3 बजे के बीच हुआ। सभी नक्सलियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के समक्ष अपने हथियार जमा कर दिए। सुबह कुम्ही गांव में इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इस महत्वपूर्ण घटना पर आईजी स्तर के अधिकारी आज प्रेस वार्ता कर विस्तृत जानकारी साझा कर सकते हैं।

 

1 करोड़ का इनामी था CCM रामधेर मज्जी

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम CCM रामधेर मज्जी का है, जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। रामधेर लंबे समय से नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व में सक्रिय था और कई गंभीर नक्सली घटनाओं में उसका नाम जुड़ा हुआ है। सरेंडर करने वालों में CCM, डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), एरिया कमेटी मेंबर (ACM) और पार्टी मेंबर (PM) स्तर के नक्सली शामिल हैं। रामधेर के आत्मसमर्पण के बाद MMC जोन लगभग समाप्त हो चुका माना जा रहा है, जो नक्सली संगठन के लिए बड़ा नुकसान है।

 

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली और बरामद हथियार

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने कुल 10 हथियार जमा किए, जिनमें AK-47, इंसास, 303 और SLR जैसे घातक असलहे शामिल हैं। निम्नलिखित है सूची:

 

नाम पद हथियार

रामधेर मज्जी –  CCM – AK-47

चंदू उसेंडी – DVCM – 30 कार्बाइन

ललिता – DVCM – कोई नहीं

जानकी – DVCM – इंसास

प्रेम – DVCM – AK-47

रामसिंह दादा – ACM – 303

सुकेश पोट्टम – ACM – AK-47

लक्ष्मी – PM – इंसास

शीला PM इंसास

सागर PM SLR

कविता PM 303

योगिता PM कोई नहीं

 

नक्सल कमांडरों का सफाया और बढ़ते आत्मसमर्पण

साल 2025 में सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के खिलाफ अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। इस साल टॉप कमांडरों जैसे बसवाराजू, मनोज उर्फ मॉडेम बालकृष्ण, राजू दादा, कोसा दादा और जयराम का खात्मा हुआ। लगातार ऑपरेशनों से नक्सलियों पर दबाव बढ़ा, जिससे कई बड़े नक्सली आत्मसमर्पण के रास्ते पर चले। 18 नवंबर 2025 को आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़ सीमा पर टॉप कमांडर हिड़मा को मार गिराया गया, उसके बाद से आत्मसमर्पण की घटनाएं तेज हो गईं।

 

 

राज्य सरकार की ‘पूना मारगेम’ (पुनर्वास से पुनर्जीवन) जैसी पुनर्वास योजनाओं ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया है। प्रत्येक आत्मसमर्पित नक्सली को तत्काल नकद सहायता, सुरक्षा और पुनर्वास का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन के संकल्प के अनुरूप ये सफलताएं छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। हालांकि, नक्सली संगठन अभी भी चुनौती बने हुए हैं, और अभियान जारी रहेगा।

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