IAS Santosh Verma का विवादित बयान, “ब्राह्मण बेटी दान” तक आरक्षण रहे, ब्राह्मण समाज ने एफआईआर की मांग

भोपाल (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के विवादास्पद आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) कर्मचारियों के संगठन अजाक्स (AJAKS) के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने एक कार्यक्रम में ब्राह्मण बेटियों पर अशोभनीय टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। वर्मा ने कहा कि “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।” इस बयान से राज्य में सियासी और सामाजिक उबाल आ गया है। ब्राह्मण समाज ने एफआईआर दर्ज करने और अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है, जबकि सोशल मीडिया पर #BoycottSantoshVerma जैसे ट्रेंड चल रहे हैं।

 

अजाक्स कन्वेंशन में आरक्षण पर टिप्पणी

घटना रविवार (24 नवंबर) को भोपाल के अंबेडकर मैदान, तुलसी नगर में अजाक्स के प्रांतीय कन्वेंशन के दौरान हुई। वर्मा को अध्यक्ष चुने जाने के बाद उन्होंने आरक्षण व्यवस्था पर बोलते हुए यह विवादास्पद टिप्पणी की। वीडियो में वे कहते दिख रहे हैं, “जब तक मेरे बेटे का ब्राह्मण की बेटी से संबंध नहीं बने, तब तक आरक्षण रहे।” यह बयान आरक्षण को जातिगत विवाह से जोड़ते हुए दिया गया, जिसे ब्राह्मण समाज ने अपमानजनक बताया। वीडियो न्यूज24 और अन्य चैनलों पर वायरल हो गया, जहां इसे “घटिया मानसिकता” करार दिया जा रहा है।

 

ब्राह्मण समाज का विरोध, एफआईआर की मांग

बयान के तुरंत बाद ब्राह्मण समाज के संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा ने इसे “जातिवादी और अपमानजनक” बताते हुए भोपाल में प्रदर्शन की चेतावनी दी। समाज के प्रतिनिधि मंगलवार को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिलकर वर्मा पर तत्काल कार्रवाई की मांग करेंगे। एक नेता ने कहा, “यह बयान महिलाओं की गरिमा पर प्रहार है। एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।” सोशल मीडिया पर ब्राह्मण यूजर्स ने #ArrestSantoshVerma और #BrahminPride जैसे हैशटैग से कैंपेन चलाया।

सोशल मीडिया पर बवाल

ट्विटर (X) पर वीडियो को लाखों व्यूज मिल चुके हैं। न्यूज24 के पोस्ट पर यूजर्स ने लिखा, “सार्वजनिक सेवा में रहते हुए ऐसी पिछड़ी सोच? शर्मनाक!” कई मीम्स में वर्मा को “आरक्षण का मसीहा” बताकर तंज कसा गया।

फर्जीवाड़ा से प्रमोशन तक

यह वर्मा का पहला विवाद नहीं। 2021 में इंदौर में एक महिला के खिलाफ ‘मारपीट, धमकी और अश्लील सामग्री प्रसार’ के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। प्रमोशन के लिए उन्होंने कथित तौर पर सीबीआई जज के हस्ताक्षर जाली बनाकर कोर्ट ऑर्डर फर्ज किए, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। मार्च 2025 में आईएएस vs आईएफएस विवाद में वे फिर चर्चा में आए। वर्मा मूल रूप से राज्य सिविल सेवा अधिकारी थे, जिन्हें आईएएस कैडर में प्रमोट किया गया। अजाक्स अध्यक्ष बनने से पहले वे शहरी विकास विभाग में एडिशनल कमिश्नर थे।

मुख्यमंत्री मोहन यादव पर दबाव बढ़ रहा है। ब्राह्मण समाज ने कहा कि यदि कार्रवाई न हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन होगा। मंत्रालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने आईएएस कंडक्ट रूल्स के तहत एक्शन की मांग की।

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