Gandhi Jayanti 2025: महात्मा गांधी चाहते थे पाकिस्तान में बसना, जानें वजह

Gandhi Jayanti 2025

Gandhi Jayanti 2025

रायपुर। Gandhi Jayanti 2025 : महात्मा गांधी की 156वीं जयंती पर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स और किताबों के अनुसार, आजादी के बाद महात्मा गांधी खुद पाकिस्तान में बसना चाहते थे। हालांकि यह विचार उनके किसी धर्म विशेष का समर्थन करने के लिए नहीं था, बल्कि उनके पीछे अल्पसंख्यकों के प्रति चिंता और देश के बंटवारे की स्थिति में सुधार करने की भावना थी।

गांधी और देश का बंटवारा
बहुत से लोगों का मानना है कि महात्मा गांधी देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार थे। कट्टरपंथी दक्षिणपंथियों का कहना है कि गांधी ने मुसलमानों को खुश करने के लिए जिन्ना की मांग को स्वीकार किया। हालांकि वास्तविकता यह है कि गांधी भारत के विभाजन और अलग राष्ट्रों के निर्माण में विश्वास नहीं करते थे। वह हमेशा सभी धर्मों के लोगों के सहअस्तित्व में विश्वास रखते थे।

महात्मा गांधी का मकसद पाकिस्तान जाने का
पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर की किताब ‘गांधीज हिंदुज्म: द स्ट्रगल मोस्ट जिन्ना इस्लाम’ में बताया गया है कि गांधी आजादी के बाद पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए वहां रहना चाहते थे। खासकर पूर्वी पाकिस्तान के नोआखाली में, जहां 1946 के दंगों में हिंदुओं को अत्याचार झेलना पड़ा था। गांधी चाहते थे कि ऐसे हिंसाग्रस्त इलाकों में जाकर शांति कायम हो और वहां के अल्पसंख्यक सुरक्षित रह सकें।

गांधी की विचारधारा और संदेश
महात्मा गांधी ने अपनी किताब हिंद स्वराज में लिखा था कि भारत में सभी धर्मों के लोग एक साथ रह सकते हैं। उनका मानना था कि किसी भी धर्म या राष्ट्रीयता के आधार पर लोगों को अलग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “अगर हिंदू मानते हैं कि वह उसी स्थान पर रहेंगे जहां केवल हिंदू रहते हैं तो वह सपनों की दुनिया में जी रहे हैं। भारत को बनाने वाले सभी लोग—हिंदू, मुसलमान, पारसी और ईसाई—हमवतन हैं।”

पाकिस्तान जाने की घोषणा
एमजे अकबर के मुताबिक, गांधी ने 31 मई, 1947 को पठान नेता अब्दुल गफ्फार खान से कहा था कि वह पश्चिमी फ्रंटियर का दौरा करना चाहते हैं और आजादी के बाद पाकिस्तान में रहना चाहते हैं। गांधी ने साफ कहा था, “मैं देश के बंटवारे को नहीं मानता। मैं किसी से इजाजत नहीं लेने जा रहा। अगर मुझे मारते हैं तो भी मैं हंसते हुए मौत को गले लगाऊंगा। अगर पाकिस्तान बनता है तो मैं वहां जाकर देखूंगा कि वे मेरे साथ क्या करते हैं।”

महात्मा गांधी की यह इच्छा उनके अहिंसा और सभी धर्मों के लोगों के प्रति समानता के दृष्टिकोण को दर्शाती है। उनका मकसद पाकिस्तान का समर्थन करना नहीं, बल्कि मानवता और शांति कायम रखना था।

Youthwings