दीपावली से पहले पटाखा व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ीं, लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन बना बाधा, कई रिजेक्ट- कुछ लंबित
रायपुर – दीपावली का त्योहार नजदीक है, लेकिन इस बार पटाखा व्यापारियों के लिए खुशियों की बजाय लाइसेंस प्रक्रिया की उलझनें चिंता का कारण बनी हुई हैं। राज्य सरकार द्वारा पटाखा दुकानों के लिए इस बार ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य किए जाने के बाद व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई आवेदन अस्वीकृत हो चुके हैं तो अधिकांश अब भी लंबित हैं।
220 आवेदन, सिर्फ 33 को मिला लाइसेंस
इस बार जिलेभर से पटाखा दुकानों के लिए कुल 220 आवेदन आए हैं, जिनमें
22 स्थायी
198 अस्थायी लाइसेंस के लिए आवेदन किए गए।
इनमें से अब तक सिर्फ 6 स्थायी और 27 अस्थायी दुकानों को ही लाइसेंस मिल पाया है। वहीं,
47 आवेदन दस्तावेजों की कमी के चलते रिजेक्ट कर दिए गए हैं।
147 आवेदन अब भी प्रक्रियाधीन हैं।
ऑफलाइन से ऑनलाइन आवेदन प्रणाली में बदलाव बना कारण
इस वर्ष पहली बार लोक सेवा केंद्र के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से पटाखा लाइसेंस के आवेदन मंगाए गए।
पिछले वर्षों तक व्यापारी कलेक्टोरेट के कमरा नंबर 17 में जाकर ऑफलाइन आवेदन करते थे। लेकिन 2025 में 5 अगस्त से 15 सितंबर तक केवल ऑनलाइन आवेदन ही स्वीकार किए गए।
आवेदन में भारी गिरावट: सिर्फ 50% रह गए आवेदन
ऑनलाइन आवेदन प्रणाली लागू होने से इस बार पटाखा लाइसेंस के आवेदनों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
पिछले साल जिले में कुल 480 दुकानों को लाइसेंस मिला था।
260 स्थायी (नवीनीकरण सहित)
220 अस्थायी लाइसेंस
इस बार कुल मिलाकर केवल 220 आवेदन ही हुए हैं, जो कि 50% से भी कम हैं।
बिना लाइसेंस खुलने वाली दुकानों की संख्या तीन गुना
हर साल देखा गया है कि प्रशासन द्वारा जितने लाइसेंस जारी किए जाते हैं, उससे तीन से चार गुना अधिक दुकानों का संचालन बिना लाइसेंस के किया जाता है।
ऐसे में इस बार कम आवेदन के चलते अवैध दुकानों की संख्या और अधिक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन हर साल निगरानी में विफल रहता है और अवैध दुकानें बेरोकटोक चलती हैं।
प्रशासन का बयान
ई-जिला प्रबंधक कीर्ति शर्मा ने बताया “पटाखा लाइसेंस के लिए स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार के आवेदन प्राप्त हुए हैं। अभी तक 27 दुकानों को लाइसेंस जारी किया गया है, 47 आवेदन दस्तावेजों की कमी से रिजेक्ट हुए हैं, और 147 आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।”
