राशन कार्ड में बड़ा फर्जीवाड़ा: आठ जिलों में लाखों फर्जी कार्ड का खुलासा, देखें जिलेवार कार्डधारकों का डाटा
राशन कार्ड
रायपुर: छत्तीसगढ़ में बीते वर्ष समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के आंकड़ों से चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। राज्य में कुल 1,22,584 ऐसे किसान हैं जिनके नाम पर पांच एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि है, फिर भी उन्होंने पटवारी और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बीपीएल (गरीब) राशन कार्ड हासिल किया है।
केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अलग-अलग ले रहे ये किसान, समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए भी पांच एकड़ से ज्यादा भूमि का पंजीयन करा रहे हैं। इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश धान बेचने के आंकड़ों के माध्यम से हुआ है।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन की खुली धज्जियां
केंद्र सरकार की स्पष्ट गाइडलाइन के अनुसार, बीपीएल राशन कार्डधारक के लिए पांच एकड़ से कम कृषि भूमि होना जरूरी है। इससे अधिक भूमि वाले किसी व्यक्ति को बीपीएल सूची में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन, प्राप्त दस्तावेजों से पता चलता है कि छत्तीसगढ़ के हर जिले में बीपीएल कार्ड बनाने में गड़बड़ी हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई बार जिम्मेदार अधिकारी बिना क्षेत्र का दौरा किए घर बैठे ही लोगों को सूची में शामिल कर देते हैं।
इसी कारण कई छोटे और सीमांत किसान, जिनके पास पांच एकड़ से कम भूमि है, वे भी बीपीएल सूची से बाहर रह गए हैं, जबकि बड़े जमीनदार गलत तरीके से लाभान्वित हो रहे हैं।
सर्वे टीम को गाइडलाइन की जानकारी नहीं
बीपीएल कार्डधारकों का सर्वे करने वाली विभागीय टीमों को शासन की गाइडलाइन की सही जानकारी नहीं है। परिणामस्वरूप, राज्य सरकार की सूची में कहीं 2.47 एकड़ भूमि वाले धान बेचने वालों को संदिग्ध बताया गया है, तो कहीं पांच एकड़ से अधिक भूमि वालों को अपात्र मान लिया गया है।
कहीं सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा
महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार, राजनांदगांव, बेमेतरा, रायगढ़, मुंगेली, कोरबा, रायपुर और बिलासपुर जिलों में बीपीएल राशन कार्ड बनवाने के नाम पर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा सामने आया है
