भारत में जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश: पाकिस्तानी जासूस के संपर्क में थे 15 अफसर, CRPF एएसआई की गिरफ्तारी से खुला राज

नई दिल्ली: केंद्रीय जांच एजेंसियों ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में पता चला है कि 15 फोन नंबर ऐसे हैं जो पाकिस्तान में बैठे एक खुफिया ऑपरेटिव के संपर्क में थे। इन नंबरों के मालिक भारत की सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेज और विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े लोग हैं। यह खुलासा उस समय हुआ जब सीआरपीएफ के असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर मोती राम जाट की गतिविधियों की जांच की जा रही थी।

तकनीकी सर्विलांस से पकड़ा गया सुराग

सूत्रों के मुताबिक, टेक्निकल सर्विलांस में यह सामने आया कि मोती राम जाट अकेला नहीं, बल्कि 15 और नंबर भी एक ही पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में थे। कॉल रिकॉर्ड और इंटरनेट प्रोटोकॉल (IPDR) की जांच से पाया गया कि: 4 नंबर भारतीय सेना के जवानों के, 4 नंबर पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के, 7 नंबर विभिन्न राज्य और केंद्रीय सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों के हैं।

कोडनेम “सलीम अहमद” — पाकिस्तान का ऑपरेटिव :

जिस पाकिस्तानी ऑपरेटिव से संपर्क था, उसका कोडनेम ‘सलीम अहमद’ है। रिपोर्ट के अनुसार, यह एजेंट भारत के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे अधिकारियों और जवानों से संवेदनशील जानकारियां इकट्ठा करता था।

कोलकाता से खरीदी गई सिम, ओटीपी पहुंचा लाहौर :

जांच में यह भी सामने आया कि जिस फोन नंबर से मोती राम जाट संपर्क में था, वह कोलकाता से खरीदा गया था। सिम एक्टिवेशन के लिए जरूरी OTP को लाहौर में बैठे एजेंट को भेजा गया। यह सिम एक ऐसे शख्स ने खरीदी, जिसने 2007 में एक पाकिस्तानी महिला से शादी की थी और 2014 में पाकिस्तान में बस गया। यह व्यक्ति हर साल दो बार भारत आता था, खासकर कोलकाता में।

जानकारी के बदले पैसा — अलग-अलग राज्यों से मिले फंड्स:

मोती राम जाट को जासूसी के बदले में पैसे ट्रांसफर किए गए। पिछले दो वर्षों में उसे हर महीने ₹12,000 भेजे गए। ये पैसे महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, यूपी, राजस्थान, असम, दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल से ट्रांसफर हुए।

पत्रकार के जरिए शुरू हुआ जासूसी का जाल:

मोती राम जाट ने स्वीकार किया कि उसकी शुरुआत में एक पत्रकार से बात हुई, जो चंडीगढ़ के एक चैनल में काम करती थी। फिर दोनों के बीच फोन और वीडियो कॉल्स का सिलसिला शुरू हुआ। इस दौरान उसने कुछ डॉक्यूमेंट्स शेयर किए। बाद में उसे पता चला कि वह एक पाकिस्तानी अधिकारी से बात कर रहा है।

क्या जानकारी लीक की गई?

मोती राम जाट ने कथित तौर पर सुरक्षा बलों की तैनाती, जवानों की मूवमेंट, और एजेंसियों के केंद्रों से जुड़ी अहम जानकारियां साझा कीं। NIA की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पहुंच वाले सैनिक और अधिकारी भी अब जांच के घेरे में हैं।

NIA की सक्रिय जांच जारी

इस पूरे मामले की जांच में NIA, मिलिट्री इंटेलिजेंस और अन्य एजेंसियां सक्रिय हैं। जांच का दायरा अब सिर्फ मोती राम जाट तक सीमित नहीं रहा — अन्य 15 नंबरों के मालिक भी जांच के दायरे में हैं।

Youthwings