संसद शीतकालीन सत्र 2025: परमाणु ऊर्जा विधेयक समेत 10 महत्वपूर्ण बिल पेश करेगी केंद्र सरकार

नई दिल्ली। अगले महीने 1 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में केंद्र सरकार 10 नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें सबसे चर्चित ‘परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025’ शामिल है, जो निजी कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की अनुमति देगा। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, यह सत्र कुल 15 कार्यदिवसों का होगा, जो 19 दिसंबर को समाप्त होगा। सत्र में दो पुराने बिलों पर विचार-चर्चा के साथ ही वर्ष का पहला अनुपूरक बजट भी एजेंडे में शामिल है।

 

पिछले सत्रों में हंगामों से सबक लेते हुए मोदी सरकार ने विपक्ष को मनाने की कवायद शुरू कर दी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू 30 नवंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाने वाले हैं, ताकि सत्र सुचारू रूप से चले। आइए जानते हैं, सरकार किन प्रमुख बिलों को ला रही है:

 

1. परमाणु ऊर्जा विधेयक, 2025

यह विधेयक भारत में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और नियमन को मजबूत बनाने का उद्देश्य रखता है। वर्तमान में सभी न्यूक्लियर प्लांट सरकारी कंपनी एनपीसीआईएल के अधीन संचालित होते हैं। नए बिल से भारतीय और विदेशी निजी कंपनियां न्यूक्लियर पावर उत्पादन में भागीदारी कर सकेंगी, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा।

 

2. भारतीय उच्च शिक्षा आयोग विधेयक

प्रस्तावित कानून एक उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का प्रावधान करता है, जो विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वतंत्र व स्वायत्त बनाने में मदद करेगा। मान्यता और स्वायत्तता की पारदर्शी प्रणाली से उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। यह लंबे समय से सरकार के एजेंडे पर था।

 

3. राष्ट्रीय राजमार्ग (संशोधन) विधेयक

इस बिल से राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी बनेगी। इससे हाईवे परियोजनाओं में देरी कम होगी और बुनियादी ढांचे का विकास गति पकड़ेगा।

 

4. कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2025

कंपनी अधिनियम, 2013 और एलएलपी अधिनियम, 2008 में संशोधन का लक्ष्य व्यवसाय करने की आसानी बढ़ाना है। इससे कॉरपोरेट क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।

 

5.प्रतिभूति बाजार संहिता विधेयक (एसएमसी), 2025

यह बिल सेबी अधिनियम 1992, डिपॉजिटरी अधिनियम 1996 और प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम 1956 के प्रावधानों को एक एकल संहिता में समेकित करेगा। इससे वित्तीय बाजारों में अनुपालन सरल होगा और व्यापार की सुगमता बढ़ेगी।

 

6. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक

यह बिल चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाएगा। अनुच्छेद 240 के तहत केंद्र सरकार बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीधे नियम बना सकती है। इससे चंडीगढ़ का प्रशासन अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप जैसे अन्य क्षेत्रों के समान होगा। हालांकि, बुलेटिन के बाद सरकार ने स्पष्टीकरण जारी किया है।

 

7. मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) अधिनियम विधेयक, 2025

अदालतों में लंबित विवादों को तेजी से निपटाने के लिए आर्बिट्रेशन फैसलों को चुनौती देने की प्रक्रिया सरल बनेगी। इससे कंपनियों और व्यक्तियों के बीच विवादों का शीघ्र समाधान संभव होगा।

 

इसके अलावा, सत्र में ‘मणिपुर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘रद्दीकरण एवं संशोधन विधेयक, 2025’ (जिसमें 120 पुराने कानूनों को निरस्त करने का प्रावधान) जैसे अन्य बिल भी शामिल हैं। सरकार का दावा है कि ये सुधार भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन सर्वदलीय बैठक से सहमति बनने की उम्मीद है।

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