Vice Presidential Election: BJD और BRS नहीं करेंगे मतदान, उपराष्ट्रपति चुनाव में नंबर गेम का बदलता गणित

Vice Presidential Election

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Vice Presidential Election: उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में राजनीति लगातार करवट बदल रही है। नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) और के. चंद्रशेखर राव की भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने मतदान से दूर रहने का ऐलान कर दिया है। इससे मुकाबले का गणित और भी दिलचस्प हो गया है।

बीआरएस का फैसला

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि सभी सांसदों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे उपराष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे।
गौरतलब है कि बीआरएस के पास राज्यसभा में इस समय 4 सांसद हैं, जबकि लोकसभा में पार्टी का कोई सदस्य नहीं है। बीआरएस का इस तरह से पीछे हटना विपक्षी एकता के लिए झटका माना जा रहा है क्योंकि पिछली बार पार्टी ने अपने 16 सांसदों के साथ विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को समर्थन दिया था।

बीजद की रणनीति

उधर, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) ने भी यही फैसला किया है। बीजद के पास राज्यसभा में 7 सांसद हैं, जबकि लोकसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है। बीजद का यह कदम एनडीए के लिए नुकसानदायक तो नहीं है, लेकिन राजनीतिक संकेत जरूर देता है। पहले उपराष्ट्रपति चुनावों में बीजद ने एनडीए उम्मीदवारों—जगदीप धनखड़ और वैंकेया नायडू—को समर्थन दिया था। ऐसे में इस बार का तटस्थ रहना बीजेपी को जरूर अखर सकता है।

नंबर गेम का समीकरण

उपराष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यसभा के मनोनीत सदस्य मतदान करते हैं। किसी पार्टी का मतदान से दूर रहना वैध वोटों की कुल संख्या को कम करता है, लेकिन सीधे तौर पर जीत-हार पर असर नहीं डालता।
BJD और BRS के फैसले के बाद अब कुल वैध मतदाताओं की संख्या घटकर 770 रह गई है और बहुमत का आंकड़ा 386 तक आ गया है।

  • एनडीए के पास इस समय 425 सांसदों का समर्थन है। इसके अलावा जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के 11 सांसद भी एनडीए प्रत्याशी सी.पी. राधाकृष्णन के साथ खड़े हैं।

  • विपक्षी INDIA गठबंधन के पास 313 सांसद हैं और उन्हें आम आदमी पार्टी के 12 सांसदों का भी समर्थन हासिल है। इस तरह उनकी संख्या 325 हो जाती है।

इस तरह संख्या बल के हिसाब से एनडीए उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन की जीत तय मानी जा रही है। हालांकि, जीत का अंतर पिछली बार की तुलना में कम रहने की संभावना है।

BJD और BRS का यह कदम साफ दिखाता है कि दोनों दल खुद को न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस खेमे के साथ जोड़ना चाहते हैं। तटस्थ रहकर वे अपने राजनीतिक पक्ष को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, मुकाबला सी.पी. राधाकृष्णन और बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है, लेकिन संख्याबल ने तस्वीर पहले ही साफ कर दी है।

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