स्काउट गाइड जंबूरी टेंडर पर विधानसभा में हंगामा: विपक्ष के सवालों का मंत्री नहीं दे पाए जवाब
छत्तीसगढ़ विधानसभा
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान बालोद जिले में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर-रेंजर जंबूरी कार्यक्रम को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। कार्यक्रम के लिए किए गए निर्माण कार्यों और टेंडर प्रक्रिया पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए, जिसके चलते सदन में कुछ समय तक हंगामे की स्थिति बन गई।
जंबूरी आयोजन के खर्च पर उठे सवाल
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने सरकार से पूछा कि बालोद में आयोजित स्काउट-गाइड रोवर-रेंजर जंबूरी कार्यक्रम में किन-किन कार्यों पर कितना खर्च किया गया। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि किन कंपनियों को टेंडर दिया गया और टेंडर की शर्तें तय करने के लिए क्या कोई समिति बनाई गई थी। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या किसी विशेष फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया में बदलाव करने संबंधी कोई शिकायत सरकार को मिली है।
मंत्री ने दी खर्च और टेंडर की जानकारी
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने लिखित जवाब में बताया कि जंबूरी कार्यक्रम के लिए एरीना निर्माण, शौचालय, जल व्यवस्था, प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था, टेंट, डोम, बैरिकेडिंग, भोजनालय और प्रिंटिंग जैसे कार्यों पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंबूरी से जुड़े कार्यों के लिए रायपुर की मेसर्स अमर भारत किराया भंडार को लगभग 5 करोड़ 18 लाख रुपये का टेंडर दिया गया था। मंत्री ने कहा कि टेंडर की शर्तें तय करने के लिए समिति का गठन किया गया था और किसी भी फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर बदलने की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
उमेश पटेल ने उठाया काम शुरू होने का मुद्दा
विधायक उमेश पटेल ने सदन में यह भी सवाल उठाया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही जंबूरी स्थल पर निर्माण कार्य शुरू हो गया था और कई संरचनाएं आधी बन भी चुकी थीं।उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की जांच विधानसभा की उच्च स्तरीय समिति से कराई जानी चाहिए।
भूपेश बघेल ने भी उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि स्काउट-गाइड परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद अदालत तक पहुंच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंबूरी आयोजन के लिए टेंडर एक से अधिक बार जारी किए गए और जिस फर्म को काम मिला, उसे पहले से ही इसकी जानकारी थी। बघेल ने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर आचार संहिता के दौरान भी काम शुरू कर दिया गया था, जो नियमों के खिलाफ है।
मंत्री ने आरोपों को बताया निराधार
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जंबूरी आयोजन का काम पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी प्रक्रियाएं जेम पोर्टल (GeM) के माध्यम से पूरी की गईं, जहां भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रहती। मंत्री ने कहा कि जब पूरा काम नियमों के अनुसार हुआ है, तो जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।
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