बांदा POCSO कोर्ट का बड़ा फैसला: इंजीनियर और पत्नी को फांसी, 50 से अधिक बच्चों के यौन शोषण का दोषी करार

उत्तर प्रदेश के बांदा में पॉक्सो कोर्ट ने बच्चों के यौन शोषण और अश्लील सामग्री बनाकर डार्क वेब पर बेचने के मामले में इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा कि दोनों को “मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए।” इससे पहले 18 फरवरी को अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था।

50 से अधिक बच्चों को बनाया शिकार

रामभवन (55) चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात था और पत्नी दुर्गावती (50) के साथ SDM कॉलोनी में रहता था। जांच में सामने आया कि दोनों गरीब परिवारों के 5 से 16 वर्ष तक के बच्चों को लालच देकर घर बुलाते थे। वहां उनके साथ दुष्कर्म कर लैपटॉप कैमरे से वीडियो और फोटो रिकॉर्ड किए जाते थे। विरोध करने पर बच्चों के साथ मारपीट और धमकी दी जाती थी, फिर पैसे, खिलौने या मोबाइल फोन का लालच देकर चुप कराया जाता था।

डार्क वेब के जरिए विदेशों में बिक्री

31 अक्टूबर 2020 को Central Bureau of Investigation (CBI) ने इंटरपोल से मिली सूचना के आधार पर केस दर्ज किया। आरोप था कि आरोपी बच्चों की अश्लील सामग्री डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाता था। 17 नवंबर 2020 को दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांच में एक पेन ड्राइव से 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो बरामद हुए। अभियोजन के अनुसार यह सामग्री चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों तक बेची गई।

700 पन्नों की चार्जशीट, 74 गवाह

CBI ने गिरफ्तारी के 88वें दिन 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। मेडिकल रिपोर्ट, पीड़ित बच्चों के बयान और डिजिटल एविडेंस को आधार बनाया गया। ट्रायल के दौरान 74 गवाह पेश किए गए। पीड़ित बच्चों का इलाज AIIMS Delhi में कराया गया।

गवाहों पर दबाव का भी आरोप

अदालत ने पाया कि दुर्गावती ने गवाहों पर दबाव डालकर समझौता कराने की कोशिश की थी। इस आधार पर उसे भी समान रूप से दोषी माना गया। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस दोनों को जेल ले गई।

पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग

पॉक्सो कोर्ट में अभियोजन पक्ष के वकील ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है।

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