सिलतरा में बेकाबू औद्योगिक प्रदूषण: हवा के साथ उड़ती काली राख से गांवों का जीवन अस्त-व्यस्त
रायपुर। औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा के आसपास के गांवों में रह रहे लोगों के लिए प्रदूषण अब एक असहनीय वास्तविकता बन चुका है। गुरुवार दोपहर एक बार फिर हवा के झोंकों के साथ फैक्ट्रियों से उड़ती काली राख ने दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। यह नज़ारा सिर्फ एक दिन का नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों की रोज की परेशानी है।
तेज हवा और राख की बारिश
गुरुवार करीब दोपहर दो बजे मौसम बदला और तेज हवाएं चलने लगीं। इसके साथ ही सिलतरा फेस-2 की औद्योगिक इकाइयों से उठी काली राख हवा में घुल गई, जो न सिर्फ राहगीरों के लिए बाधा बनी, बल्कि आसपास के गांवों में घर-घर तक पहुंच गई। हवा में तैरती यह राख लोगों के कपड़ों, खाने और सांसों तक में शामिल हो रही है।
बारिश बनी कुछ देर की राहत
करीब ढाई बजे हल्की बारिश शुरू हुई, जिससे राख कुछ समय के लिए थम गई। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह राहत बहुत ही क्षणिक थी। बारिश के बाद भी समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है, क्योंकि राख और धूल का सिलसिला कभी खत्म नहीं होता।
“सरकारें बदलीं, हालात नहीं”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार प्रशासन को शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। “सरकारें बदलीं, विधायक बदल गए, लेकिन सिलतरा और धरसींवा क्षेत्र की तस्वीर नहीं बदली,” एक ग्रामीण ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा।
वीडियो में कैद हुआ प्रदूषण का भयावह दृश्य
इस भयावह स्थिति को ग्रामीणों ने वीडियो में रिकॉर्ड किया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि हवा के साथ उड़ती राख किस तरह से पूरे इलाके को ढक लेती है।
सिलतरा में औद्योगिक विकास की कीमत आम लोगों को अपनी सेहत से चुकानी पड़ रही है। हर दिन की यह जद्दोजहद अब एक बड़े सवाल की शक्ल में खड़ी है—क्या विकास की दौड़ में इंसानी जिंदगी और स्वास्थ्य की कोई कीमत नहीं? क्षेत्रवासियों को अब प्रशासन से सिर्फ जवाब नहीं, ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।
