आदिवासियों ने NH-130C पर किया चक्काजाम, सड़क के दोनों ओर लगी वाहनों की कतारें, जानिए पूरा मामला
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक अंतर्गत आदिवासी बहुल राजापड़ाव इलाके में आज (12 जनवरी 2026) एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन हुआ। 8 ग्राम पंचायतों के लगभग 30 गांवों से आए 2 हजार से अधिक महिला-पुरुष ग्रामीणों ने नेशनल हाइवे 130C को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि उदंती-सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में स्थित 20 से ज्यादा विद्युत विहीन गांवों में जल्द से जल्द बिजली पहुंचाई जाए।
प्रदर्शन के कारण हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। यह साल भर में इस क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर चौथा बड़ा चक्काजाम है।
अभयारण्य कोर जोन में अंडरग्राउंड बिजली की मंजूरी, लेकिन काम रुका
उदंती-सीता नदी टाइगर रिजर्व (अभयारण्य) के कोर जोन में आने वाले इन गांवों में पर्यावरण संरक्षण के कारण अंडरग्राउंड केबल से बिजली लगाने की प्रशासनिक मंजूरी पहले मिल चुकी थी। जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि बजट की कमी के कारण 2023 के बाद काम शुरू नहीं हो सका और बिना किसी स्पष्ट आदेश के रोक दिया गया।
प्रदर्शन में शामिल अम्बेडकरवादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि राजापड़ाव क्षेत्र भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) है, जहां PESA Act 1996 (पंचायत विस्तार अधिनियम) लागू है। यहां आदिवासी समुदायों को अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची और PESA के तहत विशेष अधिकार एवं संरक्षण प्राप्त हैं।
केवल 3 पंचायतों में आंशिक बिजली, 5 पूरी तरह अंधेरे में
8 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ अड़गड़ी, शोभा और गोना में आंशिक विद्युतीकरण हुआ है, जबकि भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव सहित अन्य पंचायतों के ग्रामीण आजादी के 78 वर्ष बाद भी अंधेरे में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली का अभाव संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता), 21A (शिक्षा का अधिकार), 38 और 39 (सामाजिक न्याय) के सिद्धांतों का उल्लंघन है। आज बिजली सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, आजीविका, सिंचाई और सूचना पहुंच का आधार बन चुकी है। विद्युत विहीनता बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और किसानों की फसल को सीधे प्रभावित कर रही है।
राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी
आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व में प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बावजूद काम रुकना सुशासन और विधि के शासन का उल्लंघन है। वे अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले को उच्च स्तर पर उठाएंगे।
यह प्रदर्शन आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास की असमानता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद की जा रही है, अन्यथा आंदोलन और तेज होने की आशंका है।
