इस बार होली पर भी खुले रहेंगे ठेके: क्या शराबियों को बढ़ावा दे रही है सरकार, पहले माहौल बिगाड़ो, फिर एक्शन लो?
होली
रायपुर: छत्तीसगढ़ में होली से पहले सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने त्योहार की तैयारियों से ज्यादा चर्चा शराब की दुकानों की करा दी है। इस बार होली के दिन शराब प्रेमियों को पहले से स्टॉक जमा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सरकार ने होली को ड्राई डे की सूची से बाहर कर दिया है।
नई आबकारी नीति: ड्राई डे की छुट्टी
सरकार की नई आबकारी नीति के तहत सात ड्राई डे में से तीन को खत्म कर दिया गया है। इनमें होली, मुहर्रम और महात्मा गांधी निर्वाण दिवस शामिल हैं। यानी अब होली के दिन भी शराब की दुकानें सामान्य रूप से खुली रहेंगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब त्योहारों के दौरान नशे और कानून व्यवस्था को लेकर सवाल अक्सर उठते रहे हैं।
पहले पुलिस की सख्ती, अब खुली छूट?
अब तक छत्तीसगढ़ में परंपरा रही है कि होली के दिन शराब की दुकानें बंद रहती थीं। इतना ही नहीं, होली की पूर्व संध्या पर पुलिस जगह-जगह चेकिंग कर शराब ले जा रहे लोगों से बोतलें जब्त करती नजर आती थी। लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं—अब न पुलिस की दौड़, न जब्ती का डर। सवाल ये है कि क्या यह सख्ती से राहत है या लापरवाही की शुरुआत?
‘एक पैग बचा है क्या?’ वाले दिन गए
हर साल होली के दिन दोस्तों के बीच फोन घनघनाते थे—“यार, एक पैग बचा है क्या?”
इस बार ऐसा नहीं होगा, क्योंकि जरूरत पड़ी तो सीधे दुकान जाकर खरीदारी की जा सकेगी। शराब प्रेमियों के लिए यह फैसला राहत भरा जरूर है, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इस पर बहस तेज हो गई है।
पहले माहौल बिगाड़ो, फिर एक्शन लो?
अक्सर देखा गया है कि होली के दौरान नशे की वजह से झगड़े, सड़क हादसे और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है। ऐसे में सवाल यह है कि पहले शराब बिक्री को खुली छूट दी जाए, फिर हालात बिगड़ने पर पुलिस और प्रशासन को सख्ती करनी पड़े—क्या यही शासन की रणनीति है?
सवाल बड़ा है: सुविधा या बढ़ावा?
सरकार के इस फैसले को लेकर अब दो राय साफ नजर आ रही हैं। एक वर्ग इसे व्यावहारिक और आधुनिक नीति बता रहा है, तो दूसरा वर्ग सवाल उठा रहा है कि क्या इससे शराबखोरी को बढ़ावा नहीं मिलेगा? रंगों के त्योहार में बोतलों की मौजूदगी पर बहस छिड़ चुकी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
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