Teeja Pora Tihar 2025: राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ी लोक परंपरा का भव्य संगम
Teeja Pora Tihar 2025
रायपुर। Teeja Pora Tihar 2025: राजधानी रायपुर इस बार तीजा-पोरा तिहार के पारंपरिक रंगों से सराबोर होने जा रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम को छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोक परंपरा के अनुरूप सजाया गया है। प्रांगण में नंदिया-बैला, पारंपरिक खिलौने, रंग-बिरंगे वंदनवार और स्थानीय साज-सज्जा ने एक अद्भुत छटा बिखेर दी है।
तैयारियां पूरी, 3 हजार महिलाएं होंगी शामिल
24 अगस्त को छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अवसर पर होने वाले इस भव्य आयोजन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 3 हजार महिलाएं शामिल होंगी। इनमें महतारी वंदन योजना की हितग्राही, महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियां और मितानिनें विशेष रूप से भाग लेंगी।
पूजा और प्रतियोगिताओं का रहेगा आकर्षण
इस अवसर पर शिव-पार्वती, नंदिया बैला और कृषि यंत्रों की पूजा की जाएगी। साथ ही महिलाओं के लिए लोक परंपरा से जुड़ी रोचक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इनमें फुगड़ी, जलेबी दौड़, नींबू-चम्मच दौड़ और रस्साकसी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। वहीं, मेहंदी, चूड़ी और आलता के रंगीन स्टॉल कार्यक्रम को और आकर्षक बनाएंगे। उत्सव में महिलाओं को विशेष उपहार भी दिए जाएंगे और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद भी परोसा जाएगा।
उषा बारले और आरू साहू देंगी प्रस्तुति
संस्कृति से सराबोर इस कार्यक्रम में पद्मश्री उषा बारले और प्रसिद्ध लोकगायिका आरू साहू अपनी विशेष प्रस्तुतियों से माहौल को लोकसंगीत की धुनों से भर देंगी। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अरुण साव सहित राज्य सरकार के मंत्री और कई गणमान्य लोग मौजूद रहेंगे।
छत्तीसगढ़ की असली पहचान है तीजा तिहार
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित इस तिहार का उद्देश्य केवल धार्मिक या पारंपरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को संजोना भी है। भादो माह में मनाया जाने वाला यह पर्व बेटियों और बहनों को मायके बुलाकर उनका सत्कार करने की परंपरा को जीवित रखता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं ताकि दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे।
तीजा तिहार वास्तव में छत्तीसगढ़ की असली पहचान है, जहां संस्कृति, परंपरा और स्नेह का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
