शिक्षकों का डेटा लीक! : टीचर संघ ने ई-अटेंडेंस पर उठाए गंभीर सवाल, बोले- सायबर क्राइम होने पर कौन होगा जिम्मेदार?

ई-अटेंडेंस

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के शालेय शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में लगातार किए जा रहे ई-अटेंडेंस जैसे पायलट प्रोजेक्ट पर कड़ा विरोध जताया है। संघ का कहना है कि शिक्षकों पर इन नए प्रयोगों को लागू करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि इन योजनाओं की असफलताओं की जिम्मेदारी अधिकारियों पर नहीं डाली जाती और सारी जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोप दी जाती है।

शिक्षकों की निजता पर सवाल

शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने बताया कि शिक्षा विभाग शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन पर VSK एप डाउनलोड करने के लिए मजबूर कर रहा है, जो कि निजता का सीधा उल्लंघन है। मोबाइल पर किसी भी एप को डाउनलोड करने के लिए कैमरा, डाटा आदि की अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का खतरा रहता है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस मामले को संज्ञान में लेकर इस प्रोजेक्ट को तुरंत बंद करने की मांग की है।

विश्वासघात या निरीक्षण?

संघ के महासचिव धर्मेश शर्मा ने सवाल उठाया है कि क्या विभाग अपने अधिकारी और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं करता, इसलिए उन्हें इस तरह के एप के जरिए निगरानी करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि संकुल प्राचार्य, संस्थाप्रमुख, BRCC, ABEO और BEO जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों पर विभाग भरोसा करता है या नहीं, यह जांचने की जरूरत है। उन्होंने इस अनावश्यक प्रयोग को तत्काल बंद करने की अपील की है।

नेटवर्क समस्याएं और अवैध दबाव

संघ के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी और मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि वनांचल और दूरस्थ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिससे यह सिस्टम पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता। इसके अलावा, शिक्षकों पर अवैध वसूली और दबाव बनाए जाने की शिकायतें भी मिली हैं।

निजी संपत्ति पर जबरदस्ती दबाव गैरकानूनी

शिक्षकों के मोबाइल उनके निजी संपत्ति हैं, जिनमें परिवार की निजी तस्वीरें, बैंकिंग जानकारियां और अन्य महत्वपूर्ण डेटा होता है। ऐसे में जबरदस्ती एप डाउनलोड कराना संविधान के तहत मिले निजता के अधिकार का उल्लंघन है। शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस पायलट प्रोजेक्ट पर तुरंत रोक लगाई जाए।

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