Tadmetla Naxal Attack 16th Anniversary: ताड़मेटला नक्सल हमले की 16वीं बरसी, 76 जवानों की शहादत को देश कर रहा नमन

Tadmetla Naxal Attack 16th Anniversary: छत्तीसगढ़ के इतिहास में दर्ज सबसे भीषण नक्सली हमलों में से एक ताड़मेटला हमले की आज 16वीं बरसी मनाई जा रही है। 4 अप्रैल 2010 को दंतेवाड़ा (अब सुकमा) जिले के ताड़मेटला और चिंतागुफा क्षेत्र में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में सीआरपीएफ के 74 जवान और छत्तीसगढ़ पुलिस के 2 जवान शहीद हो गए थे, यानी कुल 76 सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान देश की रक्षा में न्यौछावर कर दी थी।

आज, 16 साल बाद भी यह घटना देश के लिए एक कड़वी याद के रूप में मौजूद है, लेकिन साथ ही यह जवानों के साहस और बलिदान की मिसाल भी है। इस मौके पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है और उनके बलिदान को याद किया जा रहा है।

कैसे हुआ था यह भीषण हमला?

ताड़मेटला के घने जंगलों में उस दिन करीब 1000 नक्सलियों ने सुनियोजित तरीके से सुरक्षाबलों पर हमला किया था। सुबह करीब 5:30 से 6 बजे के बीच, जब जवान ऑपरेशन से लौट रहे थे, तभी नक्सलियों ने पहले आईईडी विस्फोट किया और फिर चारों तरफ से फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले में जवानों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

करीब 7 घंटे तक चली इस मुठभेड़ में 8 नक्सली भी मारे गए, लेकिन भारी संख्या और रणनीति के चलते नक्सलियों को बढ़त मिली। हमले के बाद नक्सली जवानों के हथियार और बख्तरबंद वाहन भी लूटकर ले गए थे। उस समय यह हमला देश के सुरक्षा बलों पर अब तक का सबसे बड़ा और घातक नक्सली हमला माना गया था।

कौन था हमले का मास्टरमाइंड?

बताया जाता है कि इस पूरे हमले की साजिश कुख्यात माओवादी नेता पापराव ने रची थी। हाल ही में पापराव ने अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है, जिसे नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।

नक्सलवाद के खात्मे का दावा

केंद्र सरकार ने हाल ही में देश से नक्सलवाद के लगभग खात्मे का दावा किया है। सरकार के अनुसार 31 मार्च 2026 तक लाल आतंक को खत्म करने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें काफी हद तक सफलता मिली है। अधिकांश शीर्ष माओवादी नेता या तो मारे जा चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि बचे हुए नक्सली अब सीमित क्षेत्रों में छिपे हुए हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की स्थिति में नहीं हैं।

शहीदों को श्रद्धांजलि

ताड़मेटला हमले की बरसी पर आज देशभर में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। यह दिन न केवल दर्द और नुकसान की याद दिलाता है, बल्कि उन वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को भी सलाम करने का अवसर है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

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